June 17, 2021

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हो गया कमाल, कोख सूनी जमीन उगलने लगी सोना

बांदा। (डीवीएनए)कौन कहता है की आसमा में सुराख नहीं हो सकता, एक पथ्थर तो तबीयत से उछालो यारो’ मेहनत व जुनून हो तो पत्थरों में भी सोना उगाया जा सकता है। यह कहावत पैलानी के प्रगतिशील किसान अरविद चंदेल ने चरितार्थ कर दी। 
उनके लगन व जुनून ने बेहद ऊबड़-खाबड़ व अनुपजाऊ जमीन को व्यवसायिक ²ष्टिकोण से महत्वपूर्ण बना दिया। अत्याधुनिक वैज्ञानिक विधि से 45 बीघे में वह दलहनी व तिलहनी फसलें कर रहे हैं। इसमें वह वार्षिक पांच से छह लाख रुपये आमदनी ले रहे हैं।
केन नदी तलहनी में बसे पैलानी कस्बे के आसपास की जमीन ज्यादातर जंगली व ऊबड़खाबड़ है। यहां के अधिकांश किसान खेतिहर तो हैं, पर जमीन अनुपजाऊ होने से वह बाहर महानगरों में मजदूरी कर रहे हैं या फिर छिटपुट व्यवसाय कर अपना पेट पाल रहे हैं। 
वहीं पैलानी के अरविद सिंह चंदेल इन किसानों के लिए प्रेरणा बन गए। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उन्होंने नौकरी की जगह खेती को चुना। अपनी 45 बीघा ऊबड़-खाबड़ जमीन में हरा सोना उपजाने की ठानी। पहले तो उसे राह कठिन लगी, पर वह पीछे नहीं मुड़े। उन्होंने पूरी जमीन को समतल कराया। 
इसकी मेड़बंदी कराई। इसमें उन्हें दो वर्ष का समय व काफी पूंजी भी लगानी पड़ी। दो वर्ष के बाद इसके अच्छे परिणाम भी देखने को मिले। 45 बीघे में मसूर, चना, सरसों की लहलहाती देख यहां के हताश किसानों ने उसकी मेहनत का लोहा माना। वह दलहनी व तिलहनी फसलों में वार्षिक पांच से छह लाख रुपये आमदनी ले रहे हैं।
 तत्कालीन डीएम जीएस नवीन कुमार ने अरविद चंदेल की इस मेहनत पर पीठ थपथपाई थी। अरविद ने अपने कृषि फार्म में दो बड़े तालाब खुदवाए। इसमें ड्रिप सिचाई पद्धति से खेती शुरू की। इस समय अरविद से प्रेरणा लेकर कई अन्य किसानों ने भी मेहनत की और जमीन को उपजाऊ बनाकर बेहतर आमदनी ले रहे हैं।

प्रगतिशील किसान अरविद सिंह चंदेल बागवानी में भी किस्मत आजमा रहे हैं। उन्होंने अपने कृषि फार्म में आंवला, पपीता, आम के बाग लगाए हैं। इसके अलावा वह उन्नतशील पशुपालन भी कर रहे हैं। अरविद कहते हैं कि थोड़ा समझ और मेहनत की जरूरत है। खेती में ही इतना मुनाफा है कि पलायन की जरूरत ही नहीं है। 
वह किसानों को प्रगतिशील किसानी के लिए प्रेरित करते हैं। अरविद सिंह कहते हैं कि अपने हाथों उगाई फसलों की अच्छी कीमत पाने के लिए उन्होंने प्रोसेसिग यूनिट डालने की तैयारी की है। चना, सरसों व कठिया गेहूं के उत्पाद तैयार कर वह अच्छी कीमत में बेचेंगे तो और मुनाफा होगा। साथ ही कई युवाओं को इसमें रोजगार भी मिलेगा।

संवाद:- विनोद मिश्रा