June 17, 2021

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Digital Varta News Agency

कुंडली से पता चलता है कि कैसे होगी ‘मृत्यु’

जन्म कुंडली में लग्न चक्र और नवांश को देखकर यह बताया जा सकता है की मृत्यु कैसे होगी।

1- जन्म के समय के आकाशीय ग्रह योग मानव के जन्म-मृत्यु का निर्धारण करते हैं। चंद्र की कलाओं में अस्थिरता के कारण ज्यादातर आत्महत्यों की घटनाएं अक्सर एकादशी, अमावस्या तथा पूर्णिमा तिथियों में या इनके आस-पास होती है, यदि बुध और शुक्र अष्टम भाव में हो तो जातक की मृत्यु नींद में होती है। अगर लग्नेश का नवांश मेष हो तो जातक की पितृदोष, पीलिया, गंभीर ज्वर, जठराग्नि आदि से संबंधित बीमारियों से मृत्यु होती है।

2- आत्महत्या या हत्या के कारणः

यदि मकर या कुंभ राशिस्थ चंद्र दो पापग्रहों के मध्य हो तो जातक की मृत्यु फांसी, आत्महत्या या अग्नि से होती है और चतुर्थ भाव में सूर्य एवं मंगल तथा दशम भाव में शनि हो तो जातक की मृत्यु फांसी से होती है। यदि अष्टम भाव में एक या अधिक अशुभ ग्रह हों तो जातक की मृत्यु हत्या, आत्महत्या, गंभीर बीमारी या दुर्घटना के कारण होती है।

3- दुर्घटना के कारण मृत्यु योग:

जिस जातक के जन्म लग्न से चतुर्थ और दषम भाव में से किसी एक में सूर्य और दूसरे में मंगल हो उसकी मृत्यु पत्थर से चोट लगने के कारण होती है।, यदि शनि, चंद्र और मंगल क्रमशः चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव में है तो जातक की मृत्यु कुएं में गिरने से होती है, और यदि सूर्य और चंद्र दोनों कन्या राशि में हों और पाप ग्रह से दृष्ट हों तो जातक की उसके घर में परिवार के सदस्यों के सामने मृत्यु होती है। यदि चंद्र मेष या वृश्चिक राशि में दो पाप ग्रहों के मध्य स्थित हो तो जातक की मृत्यु शस्त्र या अग्नि दुर्घटना से होती है। यदि चंद्र या गुरु जल राशि (कर्क, वृश्चिक या मीन) में अष्टम भाव में स्थित हो और साथ में राहु हो तथा उसे पाप ग्रह देखता हो तो सर्पदंश से मृत्यु होती है। अष्टमेश पर मंगल का प्रभाव हो, तो जातक गोली से और शनि की दृष्टि अष्टमेश पर हो और लग्नेश भी वहीं हो तो ट्रेन, गाड़ी, जीप, मोटर आदि वाहन दुर्घटना से मौत होती है।

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डिजिटल वार्ता/डीवीएनए