June 20, 2021

DVNA

Digital Varta News Agency

हंगामा है क्यों बरपा !

ध्रुव गुप्त
डीवीएनए। नए साल की आहट के साथ एक बार फिर जश्न और हंगामे का माहौल बनने लगा है। हर साल की तरह लगता है कि आने वाला साल कुछ खास होने वाला है। सच यह है कि बाहर सब कुछ वही रहेगा – वही समाज, वही रहनुमा, वही सियासत, वही सामाजिक-आर्थिक विषमताएं, वही हिन्दू-मुस्लिम, वही असहिष्णुता, वही यौन हिंसा और ऊपर से जानलेवा कोरोना वायरस के नए-नए अवतार ।

हां नए साल के बेमतलब हंगामे में असंख्य मुर्गे और बकरे ज़रूर कट जाने वाले हैं। शराब की नदियां बहेंगी। क्लबों और होटलों में नंगी-अधनंगी लड़कियां नचाई जाएंगी। नए साल में अगर कुछ नया होना है तो उसकी शुरुआत हमें ख़ुद से ही करनी होगी। कुछ ऐसा कि हमारे आसपास की दुनिया थोड़ी और मुलायम, थोड़ी और खूबसूरत, थोड़ी और निरापद बनें ! राजनीति को ख़ुद पर ऐसा हावी न होने दें कि वह हमारी वैचारिक स्वतंत्रता छीन ले या हमारी उदार सामाजिक संरचना को तोड़ डाले। नए साल में हम आपसी प्यार‌ और समझ बढ़ाने की कोशिशें करें।

सड़कों पर मानसिक दरिद्रता के प्रदर्शन के बज़ाय अपने आसपास की थोड़ी साफ-सफाई कर लें। कुछ पेड़-पौधे लगाएं । खाए-अघाए लोगों के साथ मस्ती करने की जगह कुछ खुशियां उनके साथ बांटे जिन्हें उनकी वाक़ई ज़रुरत है। थोड़ी मुस्कान उन होंठों पर धरें जो मुस्कुराना भूल गए हैं। जो रूठे बैठे हैं, उन्हें मना लें। तमाम विसंगतियों के बावज़ूद हमारी दुनिया अब भी खूबसूरत है। इसे महसूस करने के लिए किसी नशे, उत्तेजना या पागलपन की नहीं, बस थोड़ी संवेदनशीलता की दरकार है !

सभी मित्रों को नववर्ष की मंगलकामनाएं !

पेंटिंग – अनु प्रिया
(लेखक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। उपर्युक्त आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। आवश्यक नहीं है कि इन विचारों से डीवीएनए भी सहमत हो। )