June 14, 2021

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बीते साल में तोहफे तो मिले, पर बाई पास रह गया अधूरा

बांदा। (डीवीएनए) गुजर रहे साल में जिले को कई सौगातें मिलीं। इनमें पेयजल समस्या से जूझ रहे शहरवासियों को केन नदी में चेन निर्माण की सौगात मिली। वहीं केंद्रीय विद्यालय और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का तोहफा मिला। रेलवे दोहरीकरण के कार्य की शुरुआत हुई। 
कोरोना काल में विकास कार्य काफी प्रभावित हुआ। इससे औगासी यमुना पुल, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे आदि के कार्यों पर भी असर पड़ा, पर अब यह कार्य तेजी से चल रहे हैं। वहीं इस वर्ष शहर में बाईपास रोड का निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसकी हसरत अधूरी रह गई।
 वहीं बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे जिले की सबसे बड़ी सौगात रही। हालांकि कोरोना काल में विकास कार्यों को ग्रहण लगा। लेकिन अब ये बड़ी परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे नए वर्ष में दिसंबर माह तक बनकर तैयार हो जाएगा।

चार वर्ष पूर्व पशुओं को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए शासन ने बुंदेलखंड में इकलौते वेटनरी पाली क्लीनिक निर्माण की स्वीकृत दी थी। इसी के बगल 40 लाख की लागत के वेटनरी लैब बनकर तैयार हो चुका है। 6.49 करोड़ की लागत से बना भवन हैंडओवर के बाद भी ढाई वर्ष में यह चालू नहीं हो सका। 
पालीक्लीनिक में 100 फीसदी काम हो गया है। स्टाफ की तैनाती का इंतजार है। बसपा शासनकाल में शहर में वर्ष 2007 में स्वीकृत 18.6 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण दशक भर से अटका है। सरकार ने कुल 73 करोड़ 96 लाख 90 हजार रुपये कार्यदायी संस्था पीडब्लूडी को जारी किए हैं।
 पूर्व में इसकी लागत 40 करोड़ रुपये थी। फिर इसे बढ़ाकर 73.98 करोड़ कर दिया गया। इसके बाद तीसरी बार 96.90 करोड़ पुनरीक्षित लागत तैयार की गई। बाईपास की 60 मीटर चौड़ाई निर्धारित की गई थी। 200 मीटर चौड़ाई में 217 किसानों की कुल 111.6 हेक्टेअर जमीन अधिग्रहीत की गई।
 दशक भर से यह बाईपास पूरा नहीं हो सका। इसमें रेलवे लाइन और नदी में निर्माणाधीन पुल बिना बजट के अधूरे हैं। नए वर्ष में बजट मिलने पर यह पूरे होंगे और जिलेवासियों को जाम से निजात मिलेगी।

संवाद:- विनोद मिश्रा