September 29, 2021

DVNA

Digital Varta News Agency

फैली है जिसके इल्म की दुनिया में रोशनी, गुमनाम सा लगे है वो अपने दयार में

कासगंज(डीवीएनए) हिन्दी खड़ी बोली के प्रथम कवि, कब्बाली के जनक, तबला वाद्य यंत्र के आविष्कारक, सूफ़ी सन्त, कुशल सेनापति हज़रत अबुल हसन अमीनुद्दीन अमीर खुसरो” का जन्म 12 वीं सदी में उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद के पटियाली कस्बा में हुआ था। आज 27 दिसम्बर जन्म दिन पर बुद्धि जीवियों, साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों को खुसरो याद न आये और अपने ही घर में बेगाना होकर रह गए।
प्रशासनिक उदासीनता के चलते खड़ी बोली के जनक खुसरो के नाम अप्रेल माह में आयोजित होने वाला खुसरो महोत्सव आयोजित न होने से साहित्य प्रेमी व क्षेत्रवासी मायूस रह जाते हैं।

करीब दो दशक पूर्व पटियाली के बाशिंदा राज्य सभा सदस्य वसीम अहमद ने खुसरो की याद में कस्बा के किला परिसर में सांसद निधि से ख़ुसरो लाइब्रेरी व चिल्ड्रन पार्क का निर्माण कराया था। जो वर्तमान समय मे प्रशासन रैन बसेरा के रूप में प्रयोग कर रहा है।

 कस्बा के ओज कवि शरद लंकेश ने खुसरो की याद में लिखा-कभी विरह के गीत लिखे,कभी छन्द लिखे खुशहाली के।
देहली में जो दफ़्न हुए वो खुसरो थे पटियाली के।।
शायर फूल मियां अता पटियालवी कहते हैं-
फैली है जिसके नाम की दुनिया में रोशनी।गुमनाम सा लगे है अपने दयार में।।
ज़िलाधिकारी ने कराया खुसरो चबूतरा का निर्माण
महान साहित्यकार अमीर खुसरो के सम्बंध में कहावत है क़िला परिसर स्थित चबूतरे पर पटियाली प्रवास के दौरान बैठकर खुसरो रचनाएं लिखते थे। उनकी याद में तत्कालीन ज़िलाधिकारी मासूम अली सरवर ने खुसरो पुस्तकालय परिसर में खुसरो की याद में खुसरो चबूतरा का निर्माण कराया था।

संवाद:-  नूरुल इस्लाम