July 31, 2021

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Digital Varta News Agency

भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के पास धारा 144 लगाने के आदेश, मनाते हैं 1 जनवरी को 1818 की युद्ध की वर्षगांठ

पुणे डीवीएनए। जिला प्रशासन ने पेरने गांव और उसके आसपास धारा 144 लगाने का आदेश जारी किया है, जहां कोरेगांव-भीमा की जंग की स्मृति में ‘जय स्तंभ’ है. यहां हर साल एक जनवरी को दलित 1818 की जंग की वर्षगांठ मनाते हैं, जिसमें ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) के बलों ने दलित सैनिकों के साथ पुणे के पेशवा की सेना को पराजित किया था.

इस मौके पर यहां स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. दलित इस जीत को उत्पीड़ित समुदायों के आत्म-सम्मान वापस पाने की शुरुआत के रूप में मनाते हैं. हालांकि जिले के अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 (Covid 19) हालात के चलते एक जनवरी से पहले इलाके में लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाने के लिये दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 लागू कर दी जाएगी.

30 दिसंबर मध्यरात्रि से दो जनवरी 2021 तक इलाके में धारा 144 लागू रहेगी
उन्होंने कहा कि 30 दिसंबर मध्यरात्रि से दो जनवरी 2021 तक इलाके में धारा 144 लागू रहेगी और बाहरी लोगों के युद्ध स्मारक के आसपास के गांवों में प्रवेश करने पर रोक रहेगी. इससे पहले प्रशासन ने लोगों से महामारी के चलते घरों में रहकर ही श्रद्धांजलि देने की अपील की थी.

मालूम हो कि 1 जनवरी 1818 को भीमा-कोरेगांव युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी की एक छोटी टुकड़ी ने पेशवा बाजीराव द्वितीय की अपेक्षाकृत बड़ी सेना को बुरी तरह हरा दिया था. इस लड़ाई में कंपनी की तरफ से लड़ने वाले ज्यादातर सैनिक महाराष्ट्र की दलित महार जाति से ताल्लुक रखते थे. वैसे तो महार शिवाजी के समय से ही मराठा सेना का हिस्सा रहे थे लेकिन बाजीराव द्वितीय ने अपनी ब्राह्मणवादी संकीर्णता की वजह से उनको सेना में भर्ती करने से इनकार कर दिया था.

यह युद्ध ढलती हुई पेशवाई के लिए एक निर्णायक पराजय सिद्ध हुआ. मराठों की पेशवा परंपरा के सबसे कमजोर प्रतिनिधि बाजीराव द्वितीय की इस हार के बाद मराठा पेशवा कंपनी सरकार के वेतनयाफ्ता कैदी होकर रह गए. एक तरह से यह शिवाजी के स्वराज का औपचारिक अंत था.
संवाद वाजेद असलम