May 12, 2021

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DM आनन्द सिंह जिले को बनायेगें गोल्डन, बनीं रणनीति!

बांदा (डीवीएनए)। जिलाधिकारी आनन्द कुमार सिंह जिले को गोल्डन से नवाजेगें। इसके लिये उन्होनें रणनीति को परवान चढ़ाने की शुरुवात कर दी है। जिले को डीएम आनन्द सिंह द्वारा गोल्डन मय करनें का आशय पाठकों को जरूर आश्चर्य और जिज्ञासा को जगा रही होगी तो जानिये डीएम आनन्द सिंह कैसे जिले को गोल्डन बनाकर जनता के जीवन को आनन्द मय करेगें।अब पूरी खबर को विस्तार से जानिये। शासन-प्रशासन की सख्ती के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से चित्रकूटधाम मंडल में परवान नहीं चढ़ पा रही है।अब इसी संदर्भ में बांदा जिले को मंडल में नंबर एक करनें के लिये डीएम आनन्द सिंह कारणों की गहराई तक पहुचे। जिले के आयुष मान योजना के प्रभारी डाक्टर धीरेंद्र वर्मा को तलब कर योजना की विफलता की जानकारी ली की आखिर लक्ष्य तक गोल्डन कार्ड योजना पहुंची क्यों नहीं। इसमे योजना में कर्मचारियो की कमी, जैसे आपरेटर,आयुषमान मित्रोंअन्य लिपिक वर्ग की कमी सर्वाधिक बाधक है। डीएम आनंद सिंह इस बात पर आश्चर्य में पड़ गये की मंडल में बांदा जिले में सर्वाधिक धनराशि दो करोड़ से ज्यादा खर्च हो गई और परिणाम वही “ढाक के तीन पात” ही जैसी है। और वह समझ गये की मामले में कुछ न कुछ तो घपला है। उन्होनें निर्देश दिये की कर्मचारियों की कमी पूरी की जाये ताकि गोल्डन कार्ड में बांदा मंडल ही नहीं प्रदेश में गोल्डन हो सके।
इस योजना का दुखदाई पहलू यह है की स्वास्थ्य विभाग के मंडल के अधिकारी कोरोना संक्रमण काल को इसकी वजह मान रहे हैं। मंडल में 3,69,548 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाने के लक्ष्य थे, लेकिन दो साल से अधिक समय होने के बाद भी अभी तक 2,99,225 लोगाें के कार्ड बने हैं, जो लक्ष्य का 81 फीसदी है। अभी भी 70 हजार लोगोें के गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना को पूरे देश में 23 सितंबर 2018 को लागू किया था। आयुष्मान योजना में पात्रों का चयन वर्ष 2011 की जनगणना और आर्थिक गणना के आधार पर किया गया था, लेकिन अभी तक शत-प्रतिशत लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड जारी नहीं हो पाए। चित्रकूटधाम मंडल में 70,323 लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड जारी नहीं हुए। इनमें करीब 29 हजार लाभार्थी भी हैं, जिनका नाम सूची में तो है, लेकिन वे ढूंढे नहीं मिल रहे। इनमें सबसे ज्यादा संख्या मंडल मुख्यालय बांदा की है।
दूसरे नंबर पर हमीरपुर जिला है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इसमें 30 फीसदी ऐसे हैं, जिनका नाम गलत दर्ज है। ऐसे लोगों को ढूंढना मुश्किल हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शेष लाभार्थियों को खोजने के लिए टीमें सर्वे भी नहीं कर रही हैं। दावा यह की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेशपत्र दिखाने पर तुरंत गोल्डन कार्ड जारी किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मंडल के चार जिला अस्पतालों में लगभग 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य चल रहा है। आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए चयनित प्राइवेट अस्पतालों में बांदा में दो और हमीरपुर में तीन हैं। महोबा और चित्रकूट में निजी चिकित्सालय का अब तक चयन नहीं हो सका है।
वहीं चित्रकूटधाम मंडल में अब तक 7367 लाभार्थियों ने गोल्डन कार्ड से इलाज कराया गया है। इन पर आठ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुआ है। बांदा में 2195, चित्रकूट में 2153, महोबा में 1547 और हमीरपुर में 1472 मरीजों का इलाज हुआ। मरीजों के इलाज में सबसे ज्यादा दो करोड़ रुपये बांदा में खर्च हुआ। स्वास्थ्य चिकित्सा एवं परिवार कल्याण के अपर निदेशक डॉ. आरबी गौतम का कहना है कि कोरोना की वजह से गोल्डन कार्ड जारी होने में अभी भी दिक्कत आ रही हैं।जबकि तह में हकीकत भ्रष्टाचार और लापरवाही का इशारा करती है!
आयुष्मान मित्रों को शासन ने दिवाली पर बड़ी सौगात दी। उनका मानदेय 5000 से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया । अपर निदेशक डा. आरबी गौतम और बांदा नोडल अधिकारी डा. धीरेंद्र वर्मा ने बताया कि बांदा में 11, चित्रकूट में 3, हमीरपुर व महोबा में 4-4 आयुष्मान मित्र हैं। बढ़ा मानदेय नवंबर माह से मिलेगा।
आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्डधारक परिवार के प्रत्येक सदस्य को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा है। आयुष्मान में चयनित अस्पतालों में ही कार्डधारक मरीज का इलाज होगा। उधर, तमाम पात्रों को अभी भी इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। गांवों में लगाए गए शिविरों में सर्वे और सूची के बाद भी उनके कार्ड नहीं बन सके।बांदा में तो आनन्द सिंह नें गोल्डन व्यवस्था को अंजाम तक पहुचाने की ठान ली है तथा इसके लिए समय भी मुकर्रर कर दिया है।
संवाद/विनोद मिश्रा