September 18, 2021

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जामिया ने ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन किया आयोजित

दिल्ली। (डीवीएनए) जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अंग्रेज़ी विभाग ने “कन्फ्रन्टिंग द ‘ग्लोबल‘, एक्सप्लोरिंग द ‘लोकल’ : डिजिटल एप्रिहेन्शंस ऑफ़ पोएटिक्स एंड इंडियन लिटरेचर (एस)’’ विषय पर, ज़ूम के ज़रिए दो दिवसीय ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। शैक्षिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने की भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ‘स्पार्क‘ योजना के तहत और अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के सहयोग से 21 से 22 दिसंबर 2020 को इसका आयोजन हुआ।
विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग की प्रमुख और सम्मेलन की अध्यक्ष प्रो निशात ज़ैदी के स्वागत भाषण से सम्मेलन का उद्घाटन हुआ। उन्होंने वर्ष 2019 में शुरू हुई शैक्षिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने की ‘स्पार्क‘ नामक योजना के बारे में विस्तार से बताया।

जामिया की कुलपति, प्रो नजमा अख्तर ने इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले विभिन्न क्षेत्रों के, सभी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय बुद्धिजीवियों और विद्वानों का स्वागत किया और डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ के उभरते क्षेत्र के महत्व और भारत में ह्यूमैनिस्टिक इन्क्वायरी संबंधी भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए. सीन प्यू ने सम्मेलन को परिभाषित करने वाले विषयों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ और भी ज़्यादा ज़रूरी है।

प्रोफेसर अमरदीप सिंह ने मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए, हेनरी लुइस डेरोज़ियो की कविताओं के डिजिटल संस्करणों के विषयगत संग्रह का उल्लेख करते हुए कहा कि कैसे इसने रूमानियत के काव्य को दुनिया में फिर से कल्पना की उड़ान भरने का स्पेस दिया। प्रो निर्मला मेनन ने बताया कि पिछले कुछ सालों में “ई-लिटरेचर” कैसे विकसित हुआ है। यूसुफ सईद ने इस बारे में विस्तार से बताया कि यू ट्यूब ने भारत के छोटे शहरों में होने वाले पारंपरिक मुशायरों को कैसे नई ऊंचाईयां दी है। प्रो रूपिका रिसम ने डिजिटल परियोजनाओं की स्थिरता को रेखांकित किया।

पहले दिन के पूर्ण सत्र में तीन प्रस्तुतियां शामिल थीं। देबाश्री दत्तात्रेय ने असम के कार्बी एंगलोंग में कार्बी अध्ययन केंद्र और कार्बी लामेट अमेई द्वारा मौखिक परंपराओं के संरक्षण के बारे में बताया। पार्थसारथी भौमिक ने भारत में डिजिटल अभिलेखागार की चुनौतियों पर चर्चा की।

दो दिवसीय ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान डिजिटल अभिलेखागार, कंप्यूटिंग और प्रौद्योगिकियों के विभिन्न पहलुओं पर शोध करने वाले अनुसंधान विद्वानों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।

दूसरे दिन के मुख्य सत्र में प्रो माया डोड और डॉ सौविक मुखर्जी की खास परिचर्चा हुई। डॉ मुखर्जी ने वीडियो गेम का विश्लेषण करते हुए सार्थक कार्यों की अवधारणा पर ध्यान दिया, जबकि प्रो डोड ने सुलभ पहुंच के बारे में बात की।

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन संबोधन, डॉ धनश्री थोराट ने किया। जामिया के अंग्रेजी विभाग की रिसर्च स्काॅलर, ज़हरा रिज़वी और असरा ममनून ने सम्मेलन की रिपोर्ट पढ़ी। श्री रूमी नकवी के वोट आफ थैंक्स से इसका समापन हुआ। व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, पूरे सम्मेलन को यू ट्यूब से भी लाइव स्ट्रीम किया गया था।