October 22, 2021

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शीतलहर के साथ प्रदूषण ने भी जकड़ा, लोगों को हो रही परेशानी

बांदा डीवीएनए। शीतलहर और गलन बढ़ने के साथ ही चित्रकूटधाम मंडल में अब प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है।इससे वातावरण की स्थिति कोढ़ में खाज सी हो गई है। वाहनों के धुएं के साथ ठंड से बचाव के लिए जगह-जगह जलाई जा रही आग से निकलने वाला धुआं भी वायु गुणवत्ता को बुरी तरह से प्रदूषित कर रहा है। मंडल में सबसे खराब स्थिति हमीरपुर जनपद की है। यहां एक्यूआई एअर क्वालिटी इंडेक्स 211 माइक्रो प्रति घनमीटर रहा, जिससे लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हमीरपुर के बाद एक्यूआई के मामले में महोबा दूसरे और बांदा तीसरे स्थान पर है। फिलहाल चित्रकूट की वायु गुणवत्ता बेहतर है।
कोरोना काल के शुरुआती माह में महानगरों के अलावा चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों महोबा, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट जिले की आबोहवा में काफी सुधार हुआ था। लॉकडाउन लगने के बाद तो वायु गुणवत्ता में बहुत ही ज्यादा सुधार हो गया था। जब तक लॉकडाउन रहा, तब तक वायु गुणवत्ता सुधरी रही, लेकिन जैसे ही पूरे देश में अनलॉक शुरू हुआ, वैसे ही चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में भी प्रदूषण का स्तर भी बढ़ना शुरू हो गया। मंडल के चारों जनपदों की आबोहवा भी धीरे-धीरे जहरीली होने लगी। अब ठंड के साथ फिर एक्यूआई ने छलांग काफी मारी है।
करीब 10 दिन पूर्व 125 से 160 के आसपास रहने वाला एक्यूआई मंगलवार को 172 से 211 तक पहुंच गया। एअर इंडेक्स वेबसाइट के मुताबिक, मंगलवार को हमीरपुर का एक्यूआई 211 माइक्रो प्रति घनमीटर रिकार्ड किया गया। इसके अलावा महोबा का एक्यूआई 175 और बांदा का 172 एक्यूआई दर्ज किया गया। चित्रकूट का एक्यूआई 157 माइक्रो प्रति घनमीटर रहा। मौसम जानकार प्रदूषण का स्तर बढ़ने की बड़ी वजह ठंड से बचाव के लिए जगह-जगह जलाए जा रहे कूड़ा-करकट को मान रहे हैं। उनके मुताबिक, ठंड में धुंध छाने से एक्यूआई स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में बारिश होने पर ही वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
जिला अस्पताल के आकस्मिक चिकित्साधिकारी और फिजीशियन डाक्टर विनीत सचान का कहना है कि सर्दी के मौसम में सांस के रोगियों को ज्यादा परेशानी होती है। ऐसे में वायु प्रदूषण इन रोगियों के लिए और खतरनाक साबित हो सकता है। दम फूलने लगती है। उन्हें धूल, धुंध, धुआं और अन्य प्रदूषण के प्रति काफी सतर्कता बरतनी होगी। कहा कि धुंध और धुआं से आंखों में जलन होने लगती है और आंसू निकलने लगते हैं।
संवाद विनोद मिश्रा