April 20, 2021

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पुलिस महानिरीक्षक की सख्ती: साक्ष्य बनाये प्रभावशाली, बच न पाये अपराधी

बांदा (डीवीएनए)। अपराधी अक्सर कमजोर साक्ष्यों के अभाव में सजा पाने से बच निकलते हैं। इस कमी को दूर करना जरूरी हैं। इसी संदर्भ मे पुलिस महानिरीक्षक के. सत्यनारायणा ने रेंज स्तर पर गठित फोरेंसिक टीम और साइबर क्राइम के प्रभारियों को निर्देश दिया कि आपराधिक मुकदमों में वैज्ञानिक साक्ष्यों की पेशी और पैरवी इतनी बेहतर बनाएं कि आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी न हो पाएं। न ही गवाह मुकरें।
पुलिस लाइन सभागार में टीमों की बैठक में महानिरीक्षक ने कहा कि अक्सर यह देखने को मिलता है कि वैज्ञानिक साक्ष्य न होने से गवाह मुकर जाते हैं और सजा नहीं हो पाती। हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, हत्या का प्रयास, मादक पदार्थ या शस्त्रों की बरामदगी आदि की घटनाओं में वैज्ञानिक और तथ्यपरक साक्ष्य जुटाए जाने चाहिए।
उन्होंने टीमों के प्रभारियों से उनकी दक्षता और प्रशिक्षण के बारे में पूछा। प्रभारियों ने उन्हें बताया कि किस प्रशिक्षक ने क्या प्रशिक्षण दिया? महानिरीक्षक ने कहा कि महिलाध्बालिका के अपराध में जैविक साक्ष्य संग्रहित कर निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक पीड़िता को तत्काल मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा जाए। नमूनों को 72 घंटे के अंदर विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जमा होना चाहिए। फील्ड यूनिट से कहा कि सूचना मिलने पर तत्काल घटनास्थल पहुंचकर जैविक साक्ष्यों का संग्रह करें।
टीम प्रभारियों ने महानिरीक्षक को और भी जानकारियां दीं। डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने फिंगर प्रिंट व वैंजीडीन टेस्ट का लाइव डेमो दिया। अधिकारियों-कर्मचारियों से इसका प्रैक्टिकल भी कराया गया। महानिरीक्षक ने कहा कि समय-समय पर बाहर से एक्पर्ट बुलाकर प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। एफएसएल टीम लगातार साइबर थाने के संपर्क में रहेगी।
संवाद विनोद मिश्रा