April 18, 2021

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Digital Varta News Agency

2021 में ऐसे ग्रहों के परिवर्तन से आप बन सकते हो बड़े राजनेता

डीवीएनए। राजनेता बनने और राजनीति को करिअर बनाने के क्रम में सफलता हासिल करने के लिए कुछ दूसरे ग्रहीय योग भी हैं। कुछ मामलों में बृहस्पति की भूमिका अहम् होती है, कारण इससे मिलने वाला सही मार्ग दर्शन और राजनीति का गूढ़ ज्ञान व्यक्ति को मंत्री पद तक दिलवा सकता है। यह कहें कि राजनीति मे सही स्थिति इसी की वजह से मिल पाती है।

ज्योतिषाचार्य श्रीकान्त पटैरिया ने बताया की ऐसे राजनेता देश के विकास के महत्वपूर्ण विभाग अर्थव्यवस्था संबंधी वित्त मंत्रालय को संभाल सकते हैं। इसी तरह से जो बुध ग्रह के प्रभाव में होते हैं उन्हें मीडिया संबंधी प्रभार मिल सकता है। अर्थात वे राजनीतिक दल में प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभलते हैं। यानि कि राजनेता बनने में सूर्य, राहू, शनि, मंगल और चंद्रमा प्रमुख हैं तो बुध और बृहस्पति विभाग दिलाने में सहयोगी साबित होते हैं।

जन्म लग्न अनुसार राजनीति में सफलता के योग

मेष लग्न:- मेष लग्न में प्रथम भाव में सूर्य, दशम में मंगल व शनि व दूसरे भाव में राहू हों तो जनता का हितैषी राजनेता बनेगा।

वृष लग्न:- वृष लग्न दशम भाव का राहू राजनीति में प्रवेश दिलाता है। राहू के साथ शुक्र भी हो तो राजनीति में प्रखरता आती है।

मिथुन लग्न:- शनि नवम में तथा सूर्य, बुध लाभ भाव में हों तो व्यक्ति प्रसिद्धि पाता है। राहू सप्तम में तथा सूर्य 4, 7 या 10वें भाव में हो तो प्रखर व्यक्तित्व तथा विरोधियों में धाक जमाने वाला राजनेता बनता है।

कर्क लग्न:- शनि लग्र में, दशमेश मंगल दूसरे भाव में, राहू छठे भाव में तथा सूर्य बुध पंचम या ग्यारहवें भाव में चंद्रमा से दृष्ट हों तो राजनीति में यश मिलता है।

सिंह लग्न:- सूर्य,चंद्र, बुध व गुरु धन भाव में हों, मंगल छठे, राहू बारहवें भाव में तथा शनि ग्यारहवें घर में हों तो व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है। यह योग व्यक्ति को लंबे समय तक शासन में रखता है।

कन्या लग्न:- दशम भाव में बुध का संबंध सूर्य से हो, राहू, गुरु, शनि लग्र में हों तो व्यक्ति राजनीति में रुचि लेगा।

तुला लग्न:- चंद्र, शनि चतुर्थ भाव में हों तो व्यक्ति वाकपटु होता है। सूर्य सप्तम में, गुरु आठवें, शनि नौवें तथा मंगल बुध ग्यारहवें भाव में हों तो राजनीति में अपार सफलता पाता है।

वृश्चिक लग्न:- लग्नेश मंगल बारहवें भाव में गुरु से दृष्ट, शनि लाभ भाव में, चंद्र-राहू चौथे भाव में, शुक्र सप्तम में तथा सूर्य ग्यारहवें घर के स्वामी के साथ शुभ भाव में हों तो व्यक्ति प्रखर नेता बनता है।

धनु लग्न:- चतुर्थ भाव में सूर्य, बुध, शुक्र हों तो जातक तकनीकी सोच के साथ राजनीति करता है।

मकर लग्न:- राहू चौथे भाव में तथा नीचगत बुध उच्चगत शुक्र के साथ तीसरे भाव में हों तो नीचभंग राजयोग से व्यक्ति राजनीति में दक्ष होता है।

कुम्भ लग्न:- लग्न में सूर्य-शुक्र हों तथा दशम में राहू हो तो राहू तथा गुरु की दशा में राजनीति में सफलता मिलती है।

मीन लग्न:- चंद्र, शनि लग्न में, मंगल ग्यारहवें तथा शुक्र छठे भाव में हों तो शुक्र की दशा में राजनीतिक लाभ तथा श्रेष्ठ धन लाभ होता है।
केवल लग्न कुण्डली मात्र से राजनीतिक कैरियर का निर्धारण होता है।

इस मामलें में लग्न कुण्डली के साथ-साथ कुछ वर्ग कुण्डलियां भी महत्त्व की होती हैं। जैसे कि लग्न कुण्डली में यह देखा जाता है कि दशम भाव अथवा दशम भाव के स्वामी ग्रह का सप्तम से सम्बंध होने पर जातक सफल राजनेता बनता है। क्योंकि सांतवा घर दशम से दशम है इसलिये इसे विशेष रुप से देखा जाता है साथ ही यह भाव राजनैतिक पद दिलाने में सहायक माना गया है। छठवा घर नौकरी या सेवा का घर होता है यदि इस घर का संबंध दशम भाव या दशमेश से होता है तो व्यक्ति जनता की सेवा करते हुए बडा नेता बनता है या नेता बन कर जनता की सेवा करता है। अब यही संकेत वर्ग कुण्डलियां भी दे रहीं हों तो समझों कि व्यक्ति राजनेता जरूर बनेगा। इसमें नवांश और दशमांश नामक वर्ग कुण्डलियां मुख्य रूप से विचारणीय होती हैं। यदि जन्म कुण्डली के राजयोगों के सहायक ग्रहों की स्थिति नवाशं कुण्डली में भी अच्छी हो तो परिणाम की पुष्टि हो जाती है। वहीं दशमांश कुण्डली को सूक्ष्म अध्ययन के लिये देखा जाता है।

यदि लग्न, नवांश और दशमाशं तीनों कुण्डलियों में समान या अच्छे योग हों तो व्यक्ति बडी राजनीतिक उंचाइयां छूता है|

किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) जी से सीधे संपर्क करें = 9131366453