April 14, 2021

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Digital Varta News Agency

धर्म की स्थापना को ईश्वर को लेना पड़ता है अवतार

 श्रीराम विवाह महोत्सव का तीसरा दिन

भगवान राम का जन्म हुआ तो अयोध्या नगरी के निवासी हर्षित हो मंगलगान करने लगे  कुशीनगर। (डीवीएनए)पृथ्वी पर जब-जब असुरों का आतंक बढ़ा है तब-तब ईश्वर ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर संहार किया है। जब धरा पर धर्म के स्थान पर अधर्म बढ़ने लगता है तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर को आना पड़ता है। भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की। यह बातें तमकुही विकास खंड के बरवा राजापाकड़ गांव के बहुरिया टोला के शिव राम-जानकी मंदिर परिसर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम विवाह महोत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार की रात्रि हरिद्वार से पधारे कथावाचक राम सिमरन दास ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए कही।

उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति ईश्वर की सत्ता को मनाने से भले ही इंकार कर दें। एक न एक दिन उसे ईश्वर के महत्व को स्वीकार करना ही पड़ता है। संसार में जितने भी असुर उत्पन्न हुए सभी ने ईश्वर के अस्तित्व को नकार दिया और स्वंय भगवान बनने का ढोंग करने लगे, लेकिन जब ईश्वर ने अपनी सत्ता की एक झलक दिखाई तो सभी का अस्तित्व धरा से ही समाप्त हो गया। अधर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो लेकिन धर्म के मार्ग पर चलने वाले के आगे अधिक समय तक नहीं टिक सकता।

कथावाचक ने कहा कि ब्राह्मण पूज्यनीय होता है। ब्राह्मण का कभी उपहास नहीं करना चाहिए। इसने उपहास किया है उसका सर्वनाश ही हुआ है। उन्होनें श्रीराम जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ तो अयोध्या नगरी के निवासी हर्षित हो मंगलगान करने लगे। पांडाल में श्रद्धालुओं के जयकारे से समूचा वातावरण राममय हो उठा।

महंत नारायणदास ने भजन प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान प्रधान बैरिस्टर प्रसाद, राजू जायसवाल, केदारनाथ वर्मा, लाल बिहारी पटेल, शेषनाथ वर्मा, रामनरेशलाल श्रीवास्तव, नंदलाल चौहान, राहुल जायसवाल, विजय श्रीवास्तव, उमेश पटेल, विकास वर्मा, नागेन्द्र वर्मा, काशीनाथ वर्मा, पंकज सिंह, ओमप्रकाश जयसवाल, प्रमोद सिंह, गोपाल जायसवाल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।संवाद:- कुशीनगर