April 18, 2021

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सुबह के उनींदे फूलों पर यह ताजा मुस्कान पत्तियों पर चमकती

सुबह के उनींदे फूलों पर
यह ताजा मुस्कान
पत्तियों पर चमकती
ओस की चंद पाकीजा बूंदे
हवा में आहिस्ता उठती
कोई रहस्यमयी गंध
आंखों में गहरे धंसते
कई सारे रंग
और उन रंगों से झांकते
विरह के गीले, अबूझ शब्द
क्या पता ये फूल हैं
या अकेली, उदास पृथ्वी के
मासूम से प्रेमपत्र
जिन्हें पढ़कर अभी-अभी
आकाश ने बहाए हैं
कुछ बूंद आंसू !
ध्रुव गुप्त