July 24, 2021

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फिल्मों के डायलॉग तक सिमटा रामपुरी चाकू, दम तोड़ रहा है कारोबार

रामपुर। डीवीएनए

हाथ में खुला हुआ चाकू और उसके बाद यह डायलॉग “यह रामपुरी है, लग जाये तो खून निकल आता “अक्सर लोगों ने हिंदी सिनेमा घरों में प्रसारित हो चुकी पुरानी फिल्मों में जरूर सुना होगा । लेकिन वक्त के साथ रामपुर के चाकू की धार कुंद होने लगी थी। देखते ही देखते चाकू बाजार की 3 दर्जन दुकाने महज दो पर सिमट कर रह गई।

वही दर्जनों चाकू बनाने वाले कारखानों की मशीनों के पहिए भी जाम हो गए थे। लेकिन अब जिलाधिकारी आनजनेय कुमार सिंह के प्रयासों के बाद एक बार फिर से यह कारोबार देश मे ही नहीं पूरी दुनिया में धूम मचाने को तैयार है।

उत्तर प्रदेश का रामपुर आजादी से पहले एक रियासत था जहां पर कई दशको तक नवाबों ने राज किया था।

इसी दौर में यहां पर जहां सूती कपड़े आदि की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां जी वही चाकू बनाने का काम भी चरम सीमा पर था रामपुरी चाकू देश ही नहीं पूरी दुनिया में मशहूर था धीरे-धीरे कानूनी उलझनों और पाबंदियों के चलते यह कारोबार अंतिम सांसे लेने लगा जहां कई दर्जन कारखाने रामपुर में हुआ करते थे जो घटकर अब एक रह गया है कुछ इसी तरह का हाल चाकू बाजार का भी है जहां पर 40-50 दुकाने हुआ करती थी और यहां पर भी कुछ इस तरह की दिक्कतें सामने आई और महज दो दुकानों ही चाकू की पहचान को बनाए हुए हैं।

रामपुर में एकमात्र कारखाना बचा है । इस कारखाने के स्वामी एवं चाकू कारीगर यासीन 40 वर्षों से यह काम करते चले आ रहे हैं उनके हालात भी बद से बदतर हो गये है।

इसका सबसे बड़ा कारण यह भी है कि चाकू रखने वाले पर पुलिस की पैनी नज़र पड़़ जाये तो उसे कानूनी प्रावधानो से गुजरना पड़ जाता है.इस लिए मार्केट मे चाकू खरीदार ढूंढने से भी नहीं मिल पाते है । हालांकि कि 5 इंच से बड़ा चाकू ही कानून अवैध माना जाता है। वही इसका दूसरा कारण यह भी है कि मौजूदा वक्त पहले के मुकाबले महंगाई काफी बढ़ चुकी है और 2 वक्त की रोजी रोटी बड़ी मुश्किल से उनके हाथ मे आ रही है।

वहीं इस कारोबार से जुड़े दर्जनों कारीगर चाकू की मांग ना आने पर अब इसे अलविदा कह चुके है । फिर भी इन हालातों में एक मात्र करीगर यासीन रामपुरी चाकू की पहचान को कायम रखने का प्रयास कर रहे हैं।

चाकू कारीगर यासीन के मुताबिक यहां पर चाकू कारोबार बड़े पैमाने पर हुआ करता था और इसके डिमांड देश ही नहीं दुनिया तक मती लेकिन कानूनी पाबंदी के चलते यह कारोबार विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया वह मात्र एक ही कारीगर हैं जो चाकू बनाकर रामपुर की पहचान को कायम रखे हुए हैं उनका कहना है कि इस कारोबार मैं उन्हें बहुत कम मजदूरी मिलती है इसके अलावा बिजली का भी काफी खर्च है अब उन्हें इस बात की खुशी है की जिलाधिकारी रामपुर द्वारा फिर से इस कारोबार को बढ़ावा दिए जाने का प्रयास किया गया है।

जिलाधिकारी आनजनेय कुमार सिंह के मुताबिक देखिए दूर भाग रहा के चाकू को हमेशा नेगेटिव सेंस में लिया गया एक समय चाकू को नेगेटिव सेंस के लिए जाना भी जाता था जबकि हम चाकू को रोजमर्रा की जिंदगी में कई सारी जगहों पर करते हैं चाकू उत्पाद को बढ़ाया जा सकता है।

इसी के मद्देनजर हमने जो चाकू यहां का मशहूर चाकू था और बेहतर करके घरेलू इस्तेमाल के लिए चाहे होटलों में इस्तेमाल हो चाहे घरों में इस्तेमाल हो एक नए कलेवर में हम उसको प्रस्तुत कर रहे हैं मैं ब्रांड के साथ उसको प्रस्तुत कर रहे हैं वही पुराना डिजाइन का चाकू वही पुरानी पहचान वाला जादू नए तरीके से इस्तेमाल होगा नए ब्रांड के साथ इस्तेमाल होगा हम उसकी पूरी कवायद कर रहे हैं और इसके प्रमोशन का भी कार्यक्रम है।
संवाद राकेश पाण्डेय