September 18, 2021

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विशेष: किसान आंदोलन के समर्थन में उतरे फिल्म अभिनेता रजा मुराद

लखनऊ। डीवीएनए

हिंदी फिल्म जगत के मशहूर अभिनेता और दमदार आवाज के मालिक रजा मुराद ने जहां देशव्यापी किसान आंदोलन का समर्थन किया है। वहीं इस धरने मैं शामिल लोगों को भाजपाइयों द्वारा किसान ना माने पर अपने अंदाज में कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

फिल्म अभिनेता रजा मुराद अपनी जन्मभूमि रामपुर पहुंचे जहां पर उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब अपने चित परिचित अंदाज में दिया है।

सवाल: किसान आंदोलन पर आपका नजरिया क्या है ?

जवाब : देखिए ऐसा है कि डेमोक्रेसी में प्रजातंत्र में हर इंसान को अपनी बात रखने का हक है हर इंसान को प्रोटेस्ट करने का हक है हर इंसान को धरना देने का हक है और जो किसान कर रहे हैं वह उनका हक है बात और हिंदुस्तानी नागरिक भारतीय नागरिक उनका हक है कर सकते हैं।

मैं यही कहता हूं कि कोई भी जो प्रदर्शन है वह उग्र नहीं होना चाहिए उसमें हिंसा नहीं होनी चाहिए उसमें वायलेंस नहीं होना चाहिए और आप कोई ऐसा कदम ना उठाएं जिससे कि आम जनता को तकलीफ हो रास्ता रुकेगा तो कोई कचहरी नहीं जा पाएगा कोई अस्पताल नहीं जा पाएगा कोई किसी की फ्री नल अटेंड नहीं कर पाएगा तो इससे आम इंसान को तकलीफ होती है वह नहीं होनी चाहिए।

सवाल: भाजपाइयों द्वारा आंदोलन में शामिल लोगों को किसान नहीं माना जा रहा है ?

जवाब: तो किसान नहीं है तो कौन है फिर कौन है किसान नहीं है तो कौन हो सकते हैं हिंदुस्तानी है किसान हैं बिल्कुल हैं देखिए सपोर्ट का जहां तक सवाल है मैं यही कहूंगा कि जो आपका हक है वह आपको मिलना चाहिए वह किसान हो मजदूर हो , उसके जो हक है हकूक हैं वह महफूज रखना चाहिए वह उसको मिलना चाहिए आप जहां तक गवर्नमेंट और किसान आंदोलन का सवाल है।

किसान जो है उन्हें जो चाहिए उसके लिए सरकार पूरे तौर पर राजी नहीं है और सरकार ने जो तरमीम की बात की है अमिटमेंट की बात की उस पर किसान राजी नहीं हुए हैं तो यह एक डेडलॉक गया है अगर ऊपर वाले ने जो समस्या बनाई है तो उसका समाधान भी बनाया है दुनिया में ऐसी कोई समस्या आज तक नहीं आई है जिसका कोई समाधान नहीं है हर समस्या का समाधान है तो इसमें नियत होनी चाहिए अगर दोनों पक्ष जो है अपनी अपनी बातों पर अड़े रहेंगे तो फिर यह बहुत लंबा खिंच सकता है और इसका जो नुकसान है पूरे देश को होगा हर नागरिक को इसका नुकसान होगा अगर खेती नहीं होगी अगर उपज नहीं होगी अगर अनाज नहीं आएगा तो किसान जैसा के लाल बहादुर शास्त्री का नारा था।

जितना अहम जितना महत्वपूर्ण एक जवान है उतना किसान भी है जवान जो है देश की रक्षा करता है सुरक्षा करता है बॉर्डर पर लेकिन उसे अन्न खिलाने वाला तो किसान ही है बिना अन्न के तू लड़ नहीं सकता इंसान और भूखे पेट भजन भी नहीं होते हैं और खाली पेट लड़ा भी नहीं जा सकता है तो किसान की बहुत बड़ी अहमियत है हमारे मुल्क में।
संवाद राकेश पाण्डेय