October 27, 2021

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करोड़ो की भूमि पर मूंछ की लड़ाई में अब तेज़ी आ गयी है, कभी भी घट सकती है कोई घटना

मुरादाबाद। डीवीएनए
ठाकुरद्वारा के कमालपुरी चौराहे पर स्थित 30 करोड़ की संपत्ति पर मूंछ की लड़ाई में अब तेज़ी आ गयी है। इस मूंछ की लड़ाई में करोड़ों का मुनाफा देखते हुए कुछ ताकतवर भी पर्दे के पीछे से लग गए हैं। इन पर्दे के पीछे से काम करने वाली शक्तियों से स्थानीय प्रशासन की भी नींद हराम हो गयी है।
नगर के कमालपुरी चौराहे पर स्थित भूमि गाटा संख्या 68, व 69 की कीमत वर्त्तमान में लगभग 30 करोड़ है उक्त भूमि पर 2015 से नगर के उधोग पति खलील सैफी व उनके चचेरे भाई हबीबुर्रहमान के बीच विवाद चला आ रहा था। समय के साथ भूमि क़ीमती होती चली गयी तो विवाद भी गहराता चला गया।खलील सैफी इस मामले को न्यायालय ले गए थे और न्यायालय ने वर्ष 2015 में यथास्थिति बनाये रखने के आदेश पारित कर दिए थे। बाद में कभी आदेश जारी हुए और कभी निरस्त हुए और मुकदमा चलता रहा।कुछ दिन पूर्व उधोग पति ख़लील सैफी की बीमारी के चलते मौत हो गई तो मुकदमे की कमान उनके वारिसों सगीर आलम व जुनैद आलम ने संभाल ली।कुछ समय पूर्व इस मामले में 23 नवम्बर 2020 को उस समय फिर से तेज़ी आ गयी जब ख़लील सैफी के पुत्रों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र सौंप कर कहा कि उनकी करोड़ो रूपये की भूमि पर हबीबुर्रहमान व कुछ अन्य लोग दबंगई के बल पर निर्माण कार्य करा रहे हैं।इस शिकायत पर 27 नवम्बर को निर्माण कार्य को रुकवा दिया गया लेकिन बाद में फिर निर्माण कार्य शुरू हो गया। उधोग पति ख़लील सैफी के पुत्रों का आरोप है कि इस मामले में न्यायालय ने 24 दिसम्बर तक यथास्थिति के आदेश दिए हैं और उनके पिता की मौत से संबंधित पत्रावली तलब की है लेकिन दबंगई के बल पर उनकी करोड़ो की भूमि को कब्जाने के प्रयास जारी हैं। इस भूमि में जो लोग आमने सामने हैं वो तो सब हैं ही लेकिन पर्दे के पीछे से जो खेल इस भूमि को लेकर खेला जा रहा है उसमें स्थानीय प्रशासन को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में पर्दे के पीछे दोनों ही पक्षों के पास कुछ ऐसी ताकतें हैं जिनके फोन पर स्थानीय प्रशासन कभी काम को रुकवाता हे तो कभी करने के लिए हरी झंडी दिखा देता है। आशंका जताई जा रही है कि ये करोड़ों की भूमि का मामला समय रहते नही सुलझ सका तो कभी भी कोई घटना घटित हो सकती है।
संवाद यामीन विकट