October 27, 2021

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युवा शायर एवं कवि मिन्नत गोरखपुरी समाज सेवा में भी बना चुके हैं अपना एक स्थान

गोरखपुर-डीवीएनए।युवा कवियों एवं शायरों में अपनी पहचान बना चुके गोरखपुर शहर के मिन्नत गोरखपुरी किसी परिचय के मोहताज नहीं है। अपनी कविता और शायरी एवं गजल के बेजोड़ कवि और शायर हैं। अपने मंच संचालन से वह श्रोताओं का दिल जीत लेते हैं और श्रोता बिना ताली बजाए नहीं रह पाते। समाजसेवा तो इनके रग रग में भरा है। अनेकों पुरस्कार से सम्मानित एवं कई सामाजिक मंचों से जुड़े हैं मिन्नत गोरखपुरी।
ई.मोहम्मद मिन्नतुल्लाह ष्मिन्नत गोरखपुरीष् गोरखपुर शहर की एक ऐसी शख्सियत हैं जो इंजीनियर होने के साथ-साथ साहित्यकार युवा कविध्शायर व मंचसंचालक एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता राष्ट्रीय मानवाधिकार संघ-भारत, मोटीवेटर एवं गोरखपुर लिटरेरी सोसायटी के संस्थापक भी हैं जिनका लक्ष्य राष्ट्र को और समाज को सशक्त बनाना और युवाओं को अवसर प्रदान करना है। समाज सेवा के माध्यम से हो या साहित्य के माध्यम से यह निरंतर लगे रहते हैं। देश के कई राज्यों में उन लोगों की प्रेरणा बन चुके मिन्नत गोरखपुरी का मानना है कि हम शिखर पर तभी पहुंचते हैं जब देश शिखर पर होता है और लोगों बहुत सारा प्यार और आशीर्वाद मिलता है। मिन्नत गोरखपुरी समय-समय पर विभिन्न समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में अपना लेख लिखते रहते हैं और अपने विचारों से समाज को अवगत कराते हैं। मिन्नत गोरखपुरी ने गोरखपुर महोत्सव, देवरिया महोत्सव और चैरी चैरा महोत्सव में सफल संचालन किया है।मिन्नत गोरखपुरी राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई बीबीडी विश्वविद्यालय के छात्र प्रमुख वी रह चुके हैं।
कई पुरस्कारों से हैं सम्मानित
इनके द्वारा साहित्य में दिए जा रहे योगदान के लिए धाराधाम साहित्य रत्न सम्मानऋ 2021 थाईलैंड से प्रदान किया गया है, स्वर्गीय मनोहर पारिकर साहित्य सम्मान 2019, आब-रू-ए गजल फिराक बाराबंकवि अवार्ड 2019 के साथ-साथ पूर्वांचल यूथ आईकॉन अवॉर्ड बॉलीवुड के हीरो नंबर वन गोविंदा के हाथों मिन्नत गोरखपुरी को प्रदान किया गया है!
सामाजिक कार्यों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दर्जनों अवार्ड के साथ-साथ बेस्ट एनएसएस वालंटियर अवार्ड कई बार मिन्नत गोरखपुरी को मिला है।
पत्रिकाओं एवं न्यूजपेपर में कई रचनाएं प्रकाशित हुई है। इसके साथ-साथ कई टेलीविजन चैनल रेडियो स्टेशन आकाशवाणी और कई एफएम चैनल पर भी मिन्नत गोरखपुरी अपनी प्रस्तुति देते रहे हैं। मिन्नत गोरखपुरी ने अंतर्राष्ट्रीय शायर वसीम बरेलवी, मुनव्वर राना,डॉक्टर कलीम कैसर, दिनेश बावरा, शकील आजमी, डॉ रामप्रकाश बेखुद, वासिक फारुकी, फैज खुमार बाराबंकवि, भूषण त्यागी, शबीना अदीब, शाइस्ता सना, अंकिता सिंह, जैसे शायरों के साथ प्रस्तुति दी है।
गजल से समझा जा सकता है लेखन कार्य
इनके लिखे गजलों को पढ़कर और सुनकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी गजलों में अपने पुराने पूर्वजों और दूसरे बड़े शहरों की झलक देखने को मिलती है।
गजल
यादें महबूब को सीने से लगाये रखना,
महफिलें इश्क को हर वक्त सजाये रखना,
याद आयेगा मेरा हुस्न व वफा रह-रह कर,
मेरी तस्वीर को सीने से लगाये रखना,
तेग व अबर को रखना जरूरी क्या है,
क़त्ल करना है तो खन्जर को छुपाये रखना,
मैं जहां जाऊं तेरे नाम से जाना जाऊं,
ऐसा दिवाना मुझे अपना बनाये रखना,
सो न जाये कहीं मंजिल के सिपाही थक कर,
एक तूफान जमाने में उठाये रखना,
हो के जाहिर तेरी रुसवाई न कर दे ष्मिन्नतष्,
अपने हर दर्द को सीने में छिपाये रखना ।।
मिन्नत गोरखपुरी
झूठा ही ख्वाब दिखाया गया मुझे।
कदम-कदम पर आजमाया गया मुझे।।
होता रहा था रोज ही मेरा मुसीबत से सामना।
हजारों दफा यारों रुलाया गया मुझे।।
अँधेरों की साजिशों मे हम दर-बदर रहे।
उजालों से ही दूर देखो भगाया गया मुझे।।
जो किया ही नही वो खता मेरे सिर पर आ गई।
दूसरों का ही इल्जाम लगाया गया मुझे।।
अब कोई नही है पूछता कैसा है हाल मेरा।
पहले जला कर बाद मे बुझाया गया मुझे।।
जिन्दगी ने भी क्या-क्या रंग दिखाये हमे।
मतलब निकल गया तो भुलाया गया मुझे।।
मिन्नत गोरखपुरी