October 27, 2021

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Digital Varta News Agency

ऑक्सीजन नहीं, दवाएं नहीं, बिस्तर नहीं तो डॉक्टर कैसे करें इलाज

इंदौर-डीवीएनए। डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया गया है लेकिन यह भगवान प्रदेश सरकार का मोहताज दिखाई दे रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की पोल यह भगवान अब खोलने पर छोड़ गए हैं। सरकार स्वास्थ्य पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही और जनता को बता भी रहे हैं लेकिन इन भगवान का कहना है कि अस्पतालों में ना तो ऑक्सीजन है ना दवाएं हैं न ही बिस्तर हैं तो हम मरीज का कैसे इलाज करें मरीज की मौत हो जाती है तो हमें जिम्मेदार ठहराया जाता है हमारे पास कोई जादुई चिराग तो नहीं है कि हम मरीज को इस चिराग के जरिए स्वस्थ कर दें मरीज को स्वस्थ करने के लिए हमें सभी सुविधाएं चाहिए जो सरकार नहीं दे रही है।
इधर जूडा कह रहा है कि जुल्म, अत्याचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। डॉक्टर्स अगर अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं, आपदा के इस समय में जहां आपके अपने सगे साथ नहीं थे उस वक्त भी डॉक्टर्स आपका इलाज कर रहे थे। अस्पताल में जब बिस्तर नहीं हैं, दवाई नहीं है ऑक्सीजन नहीं है तो जिम्मेदारी सरकार की है ना की वहाँ कार्यरत डॉक्टर की है।
सरकार दोषी, डॉक्टर नहीं
जूडा का कहना है कि जब सुविधाएं नहीं हो तो फिर उसका दोष डॉक्टर्स पर क्यों? तो फिर उसका गुस्सा डॉक्टर्स पर क्यों? तो फिर डॉक्टर्स के साथ बदसलूकी और मारपीट क्यों? सवाल उठाइए, परंतु सही जगह – जनता को यह समझ आना चाहिए कि डॉक्टर्स भी आपकी ही तरह इंसान है परंतु आज उन्हें इंसान से ही डर क्यों?? क्यों आज डॉक्टर्स अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं? आखिर कौन जिम्मेदारी लोग उनकी सुरक्षा की जो हर पाल किसी की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे?
डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए बनाएं कड़ा कानून
इसके लिए पूरे देश भर में सभी जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने और आई एम ए ने एक साथ विरोध जताया और सरकार से इसके लिखाफ सख्त कानून बनाने की मांग की। जूडा इंदौर ने भी इसका समर्थन करते हुए काली पट्टी बान्ध कर काम किया।