October 27, 2021

DVNA

Digital Varta News Agency

बांदा की अमलोर बालू खदान, क्या हो रहीं ब्लैक मेलिंग का शिकार?

बांदा-डीवीएनए। पैलानी क्षेत्र अमलोर गांव की केन नदी बालू खदान ब्लैक मेलिंग की शिकार के चक्कर में बेवजह शिकायतों के शिकंजे में है!पर्यावरण के रक्षा की आड़ में कुछ समाज सेवी आखिर क्यों धन भक्षक बन गये है? पर्यावरण की चिंता उन्हें अब सिर्फ आमलोर खदान में बालू के खनन में ही क्यों दिखाई दे रही है? इसका पर्दाफाश हम करेंगे। जिले में जो आमलोर खदान बखूबी नियमों के अनुसार चल रही है, उसे ष्तिल का ताड़ष् बनाने के पीछे गहरा रहस्य है।
सूत्र बताते है की खदान संचालक से खदान संचालित करने के लिये ग्राम पंचायत के मुखिया द्वारा 18 लाख रुपया मांगा जा रहा है, इसके अलावा तीन ट्रक बालू रोजाना देने के लिये दबाव बनाया है। खनन में जहां से वाहन निकलता है उन जमीन के मालिकों को रुपया देकर बाकायदा संचालकों का करारनामा हुआ है फिर भी संचालकों को गलत दबाव और शिकायतों के माध्यम से परेशान किया जा रहा है। पुलिस में संचालकों के खिलाफ हमला और धमकी की शिकायतें की जा रहीं हैं? आखिर क्यों? पर्यावरण प्रेमियो का आमलोर खदान के पीछे अनर्गल प्रेम क्यों?
हम हमेशा से नियम विरुद्ध खनन के विरोधी हैं। लगातार खबरे लिखते हैं और दिखाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की विरोध कथित रूप से ब्लैक मेलिंग के लिये है। पोकलैंड जल धारा के बीच नहीं चल रही। बालू और पौधरोपण वाली गांव समाज की भूमि से बालू के ट्रक नहीं निकले। यह कटु सच्चाई है। अनर्गल आरोपों से मुद्दे को गरमाया जा रहा है। इस मामले की जांच होनी चाहिऐ। ग्राम समाज की भूमि पर प्रशानिक मदद और मौजूदगी में पौध रोपण करा दिया जाये। क्या दिक्कत है? प्रशासन इस और ध्यान दे। अवैध खनन किसी खदान में होना दंडनीय है लेकिन खदान संचालकों को जो नियमों के तहत खनन कर रहें वह साजिश के शिकार न हों।
संवाद विनोद मिश्रा