August 3, 2021

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Digital Varta News Agency

निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने काला फीता बांधकर जताया विरोध

विकासनगर (डीवीएनए)। देशभर में चिकित्सकों के साथ हो रही हिंसक घटनाओं के खिलाफ शुक्रवार को निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने काला फीता बांधकर विरोध जताया। विरोध कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि सरकार उनके खिलाफ हो रहे हमलों पर उचित कार्यवाही नहीं कर रही है। जबकि हिंसक घटनाओं के दौरान डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के घायल होने के साथ ही अस्पतालों को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शुक्रवार को डाकपत्थर से लेकर सेलाकुई तक के करीब दो दर्जन छोटे-बड़े निजी अस्पतालों के डॉक्टर विरोध में उतरे। सभी डॉक्टरों ने काला फीता बांधकर ओपीडी में मरीजों का उपचार किया।
आईएमए की विकासनगर शाखा के सचिव डा. हेमंत गुप्ता ने बताया कि निजी अस्पतालों को सुरक्षित जोन बनाने, सेंट्रल हॉस्पिटल एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल प्रोटेक्शन ऐक्ट को आईपीसी और सीआरपीसी से जोडने की मांग लंबे समय से की जा रही है। लेकिन सरकार उनकी मांग को अनदेखा कर रही है। जिससे निजी अस्पतालों के डॉक्टर के खिलाफ होने वाली हिंसक घटनाओं पर रोक नहीं लग रही है। कहा कि कोविड काल में निजी अस्पतालों के डॉक्टर कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार जिम्मेदारी से कर रहे हैं। बावजूद कोविड काल में ही देशभर में निजी अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ कई हिंसक घटनाएं हुई हैं। मेडिकल स्टाफ के साथ भी हिंसक व्यवहार किया गया। कई अस्पतालों में तोड़ फोड़ कर उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचाया गया है। लेकिन सरकार अस्पतालों को सुरक्षित जोन बनाने के लिए कोई कार्यवाही नहीं कर रही है, जिससे इस तरह की हिंसक घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। इन घटनाओं से डॉक्टरों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
विरोध करने वालों में आईएमए के विकासनगर अध्यक्ष डा. यशवीर तोमर, डा. मुदित अग्रवाल, डा. मयंक शर्मा, डा. हंसराज अरोड़ा, डा. दिनेश भंडारी, डा.विरेंद्र चैहान, डा. ललित अग्रवाल, डा. नरेश राणा, डा. विकास जैन, डा. देवेंद्र रावत आदि शामिल रहे।