August 3, 2021

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भाजपा जिला कमेटी, क्या ढोल में है पोल? कैसे होगा बेड़ा पार

बांदा-डीवीएनए। भाजपा की जिला कार्यसमिति ष्क्या ढोल में पोल है?ष् राजनीतिक क्षेत्र में यह सवाल पार्टी की क्षितिज पर गरज एवं बरस से रहें हैं! संगठन की चुनावी रीढ़ मानी जाने वाली बूथ कमेटियां आखिर क्यों निष्क्रिय सी हो गई हैं!उनमें ष्प्राण वायुष् भरने कै लिये संगठन रूपी वेंटी लेटर की आवश्यता क्यों महसूस की जा रही हैं?क्या यह जिला कार्य समिति अगले साल विधान सभा की चुनावी वैतरणी पार कराने में पूरी तरह कामयाबी के पायदान चढ़ पायेगी?राजनीतिक विश्लेषक इसे संशय की दृष्टि से देखते हैं!
दरअसल जिला कार्यसमिति संगठन की जान और आत्मा होती है। लेकिन भाजपा की जिला कार्यसमिति का विहंगावलोकन करें तो इनमें अधिकांश जमीनी आधार से वंचित हैं। हाँ मोटी रकम वालों को पद वितरण में नवाजा गया जो पार्टी पदाधिकारी के रूप में संगठन को मजबूत करने की बजाय अपने एवं खुद के व्यवसाय को मजबूत करने में लगे हैं। इसके चलते संगठन की राजनीतिक मजबूती लगातार राजनीतिक हाशिये पर सरकती जा रही हैं, जो भाजपा की सेहत के लिये खतरे की घंटी से कम नहीं!चुनाव में कार्यकर्ताओ को देवतुल्य की संज्ञा से नवाजा जाता है, लेकिन चुनाव बाद वह देव तुल्य कार्यकर्ता दूध की मख्खी की तरह बाहर फेंक दिये
जातें है! आखिर क्यों? क्या इसपर विचार-मंथन की आवश्यता किसी ने समझी? क्या उसके दुखदर्द को मंत्री से लेकर मुख्य मंत्री ने सुना? ऐसा कार्यकर्ता को क्यों नहीं लगा? इस सच्चाई को एक नहीं अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता स्वीकार करते है। ऐसे तमाम कार्यकर्ता अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर कहते हैं की जब सरकार और प्रशासन में विधायकों,सांसदों की सुनवाई नहीं हैं तो भला हमारी करुण पुकार कौन सुनेगा।
कार्यकर्ताओ की माने तो जिला कार्यसमिति में नकारा लोगों की भरमार हैं जो मात्र अपने हित लाभ के लिये अपनी ढपली और अपना राग अलापते हैं! मीडिया का संचालन तो और ष्माशाअल्लाष् हैं। तमाम महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अयोग्यो के हाथ में हैं, जिनकी निष्क्रियता से संगठन में असंतोष और जन जुड़ाव से पार्टी की पकड़ ढीली पड़ती जा रही है! इसके इतर व्यकिगत प्रभाव से ही पार्टी की कुछ साख बची हुई है और वह विधानसभा चुनाव में अपना रणकौशल दिखा सकते है!
कुल मिलाकर इस जिले में भाजपा के अंदर कुछ ज्यादा बेहतर नहीं दिख रहा है,जो भाजपा की सेहत के लिये अच्छा नहीं है। इन परिस्थितियों पर प्रदेश अध्यक्ष और मुख्य मंत्री को गभीर रूप से ध्यान और संगठन को ताकतवर बनाने के लिये विचार करना होगा। कार्यकर्ताओ,विधायकों की सुननी होगी,अन्यथा की स्थिति में निकट विधान सभा चुनाव में जनता उनकी अपील को अनसुनी कर दें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
संवाद विनोद मिश्रा