September 23, 2021

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Digital Varta News Agency

विशेष रिपोर्ट: बुंदेलखंड में चेकडैम निर्माण के मॉडल में बदलाव की तैयारी, हो जायेगी बल्ले-बल्ले!

बांदा। (डीवीएनए विशेष) सिंचाई और जल संरक्षण को लेकर बुन्देलखंड की अब हो जायेगी बल्ले बल्ले। वह कैसे हम आपको अपनी विशेष खबर में बता रहे हैं। खेत और पेट के पानीके लिये तरसने वाले इस क्षेत्र लिये कम खर्च मेंयोजना वरदान साबित हो सकती है।
योजना की पृष्टभूमि यह है की प्रदेश सरकार आम लोगों के सुझाव पर सीमेंट व कंक्रीट के पक्के चेकडैम की जगह पर्यावरण हितैषी मिट्टी के कच्चे चेकडैम (अर्दन चेकडैम) बनाने के मॉडल पर विचार कर रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी ने इस प्रस्ताव को केंद्र की सहमति के लिए भेजने का निर्देश दिया है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बुंदेलखंड के चार जिलों में ‘इकोसिस्टम सर्विस बेस्ड एडॉप्टेशन टू क्लाइमेट चेंज परियोजना’ के क्रियान्वयन को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत बांदा, हमीरपुर,चित्रकूट जालौन में परियोजना का क्रियान्वयन कर जल संरक्षण की योजना है। इस संबंध में कार्यवाही हो रही है।पिछले दिनों प्रोजेक्ट की समीक्षा के लिए नाबार्ड तथा वन विभाग के अधिकारी स्थलीय भ्रमण भी कर चुकें हैं। वहां संयुक्त वन प्रबंध समितियों व ग्रामीणों ने परियोजना में स्वीकृत सीमेंट/ कंक्रीट के पक्के चेकडैम के स्थान पर अर्दन चेकडैम बनाने का आग्रह किया था। इस सुझाव को विचार के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी के समक्ष रखा गया था, जिसे मंजूरी दे दी गई है।
शासन के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार मुख्य सचिव ने इस शर्त के साथ अनुमति दी है कि अर्दन चेकडैम की न्यूनतम आयु 10 वर्ष अवश्य होनी चाहिए। इस प्रस्ताव को सहमति के लिए नाबार्ड व केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजने की कार्यवाही की जा रही है।
इस मॉडल का फायदा ज्यादा लोग पा सकेंगे। जालौन में 37.50 लाख रुपये की लागत से तीन व हमीरपुर में 50 लाख की लागत से 4 पक्के (सीमेंट/कंक्रीट) चेकडैम बनाए जाने हैं। नए मॉडल पर इसी लागत में जालौन में 41 व हमीरपुर में 56 अर्दन चेकडैम बनाए जा सकेंगे। मुख्य वन संरक्षक ने मुख्य सचिव को बता दिया है कि अर्दन चेकडैम की आयु 10 वर्ष से अधिक होती है।
संवाद विनोद मिश्रा