April 14, 2021

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अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया हजरत जुनैद बगदादी व इमाम अबू युसूफ हनफी अलैहिर्रहमां का उर्स-ए-पाक

गोरखपुर (डीवीएनए)। चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर व सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में हजरत सैयदना शैख अबुल कासिम जुनैद बगदादी अलैहिर्रहमां व हजरत सैयदना इमाम अबू युसूफ हनफी अलैहिर्रहमां का उर्स-ए-पाक अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया। कुरआन ख्वानी व फातिहा ख्वानी की गई।
चिश्तिया मस्जिद के इमाम हाफिज महमूद रजा कादरी ने कहा कि हजरत जुनैद बगदादी की पैदाइश 218 हिजरी में बगदाद में हुई। वालिद का नाम मोहम्मद बिन जुनैद था। आपका घराना इल्मी था। आपके मामू हजरत शैख सिर्री सकती मशहूर बुजुर्ग शख्सियत थे। आपने हजरत शैख सिर्री सकती, हजरत अबू उबैद व हजरत अबू अली सौर से तालीम हासिल की। बीस साल की उम्र में फतवा देना शुरू किया। आप बहुत बड़े वली, आलिम, शरीयत व सुन्नत के पाबंद थे। पूरी जिंदगी दीन-ए-इस्लाम का प्रचार करने में गुजार दी। आपका निधन 27 रजब 298 हिजरी में जुमा के रोज हुआ। आपका मजार शेनीज, बगदाद (इराक) में है।
सब्जपोश हाउस मस्जिद के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि हजरत अबू युसूफ की पैदाइश 113 हिजरी में कूफा (इराक) में ही हुई। तालीम व तरबियत कूफा में ही हुई। आप इमामे आजम अबू हनीफा के शागिर्द थे। आप फिक्ह के बहुत मशहूर व मारूफ इमाम हैं। इल्मो हिकमत, सियासत व मंजलत में कोई आपका हम पाया न था। आप हदीस के दरिया थे। आप बहुत बड़े आलिम व इबादतगुजार थे। आपने इल्म को आम किया। हनफियत को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाया। आपके शागिर्दों में इमाम मोहम्मद, इमाम अहमद बिन हबंल जैसी अजीम शख्सियत का शुमार होता है। आप दुनिया-ए-इस्लाम के पहले चीफ जस्टिस थे। आपका निधन 182 हिजरी में हुआ। आपका मजार बगदाद (इराक) में है। आपकी खादिमात पर आलमे इस्लाम को फख्र है।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर अमनो अमान की दुआ मांगी गई। शीरीनी तकसीम की गई।
उर्स में हाफिज सैफ अली, महबूब आलम, हाफिज आमिर हुसैन निजामी, अबू बक्र, गुलाम जीलानी, हाफिज सद्दाम, मुजम्मिल रजा, इमरान, इमाम हसन, मुख्तार खान, मो. जैद, मो. रूशान, आसिफ रजा, रहमत अली अंसारी, साद अहमद, अजहर अली, फुजैल, फैजान, चांद अहमद, नेसार अहमद, शहाबुद्दीन, सलीम आदि मौजूद रहे।