September 19, 2021

DVNA

Digital Varta News Agency

रिटायर्ड पुलिसकर्मियों को साइबर ठगी से बचाने को पुलिस ने कसी कमर

एटा । डीवीएनए

यूं तो लोग जागरुकता के अभाव में अक्सर साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं। परन्तु बीते कुछ दिनों में साइबर ठगी के ऐसे भी मामले संज्ञान में आये हैं जिनमें पुलिस विभाग से रिटायर्ड पुलिसकर्मियों के साथ भी साइबर फ्राड की घटनाऐं हुयी हैं।

आमजन से लेकर पुलिसकर्मियों के साथ हुई इन घटनाओं के होने का मुख्य कारण है, लोगों में साइबर क्राइम के प्रति जागरुकता की कमी। जनपदीय पुलिस द्वारा आमजन को इन साइबर अपराधों से बचाने के लिये समय-समय पर विभिन्न प्लेटफार्म के माध्यम से जागरुक किया जाता रहा है।

परन्तु अपने ही विभाग के कर्मियों को जागरुक करने के लिये अपर पुलिस अधीक्षक, अपराध एटा राहुल कुमार द्वारा एक सार्थक पहल शुरु की गयी है, जिसमें दो आरक्षियों को विशेषतः पुलिस विभाग से रिटायर्ड हुये पुलिसकर्मियों को फोन के माध्यम से साइबर अपराधों से बचाने के लिये उन्हें इसके सम्बन्ध में जानकारी मुहैया कराई जायेगी आजीवन विभाग की सेवा करने के बाद जब पुलिसकर्मी रिटायर होकर अपने घर जाता है तो अपने सेवाकाल में अपनी आगे की जिंदगी एवं अपने परिवार के भरण पोषण हेतु इकट्ठी की गई धनराशि को यूं एक झटके में खाते से चले जाने पर उसकी जो मनोदशा होती है, वह अकल्पनीय है।

ऐसे पुलिसकर्मियों को अगर पहले से जानकारी मिल जाये कि किसी भी अज्ञात फोन काॅल पर अपने खाते सम्बन्धी जानकारी साझा नहीं करें तो वह इसका शिकार होने से बच सकते हैं। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुये अपर पुलिस अधीक्षक अपराध एटा द्वारा जनपद में साइबर सेल के अन्तर्गत दो आरक्षियों को नियुक्त कर एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें जनपद से रिटायर्ड होने वाले सभी पुलिसकर्मियों को प्रतिदिन फोन के माध्यम से साइबर अपराधों से बचने की जानकारी दी जा रही है। साथ ही मुख्यालय स्तर पर सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों की समय-समय पर गोष्ठी आयोजित कर भी उन्हें जागरुक किया जायेगा।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
• ट्रेजरी और बैंक फोन करके कभी खाते की गोपनीय जानकारी नहीं मांगती है।
• आपके मोबाइल पर कोई पासवर्ड आए तो किसी से उसे शेयर नहीं करें।
• कभी-कभी शातिर नेट बैकिंग की रिक्वेस्ट भेजने के बाद फोन करते हैं। कहते हैं कि आपके मोबाइल पर एक पासवर्ड आया होगा, उसे बता दें, ताकि आपका खाता अपडेट किया जा सके।
• ट्रेजरी से संबंधित कोई भी जानकारी चाहिए हो वहां खुद जाएं, संबंधित अधिकारी और बाबू से मिलें।
• आपके खाते में जो रकम है उसे सेविंग प्लस मोड में रखें। जाम रकम का बड़ा हिस्सा एफडी बन जाता है। थोड़ी रकम खाते में बचती है।
• जिस खाते से नेट बैंकिंग करें उसमें ज्यादा कैश नहीं रखें ।

संवाद वैभव पचौरी