June 17, 2021

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उप-राष्ट्रपति ने युवाओं से भारत की विकास गाथा लिखने में आगे आने का किया आह्वान

नई दिल्ली डीवीएनए। भारत के उप राष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने भारत की विकास गाथा लिखने में युवाओं से आगे रहने का आह्वान किया।

आज वह चेन्नई स्थित राजभवन में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की तमिल में लिखी गई जीवनी के लोकार्पण अवसर पर बोल रहे थे। इस पुस्तक का शीर्षक है ‘अब्दुल कलाम-निनैवूगलुक्कू मारनामिल्लई’, जिसे डॉ कलाम की भांजी डॉक्टर एपीजेएम नजमा मरईकायर और जाने-माने अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ वाईएस राजन ने लिखा है। तमिल भाषा में इस पुस्तक की रचना के लिए लेखकों की प्रशंसा करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा मातृभाषा में पुस्तकों की रचना अधिक से अधिक संख्या में लोगों तक पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका है।

भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए श्री नायडू ने इसका समग्रता में लाभ उठाए जाने का आह्वान किया ताकि कृषि से लेकर विनिर्माण तक सभी क्षेत्रों में प्रगति की रफ्तार को बढ़ाया जा सके और आने वाले वर्षों में एक टिकाऊ विकास दर हासिल की जा सके। देश की 65% आबादी के 35 वर्ष से कम उम्र का और 50% आबादी के 25 वर्ष से कम उम्र का होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह ऐसा समय है जब देश के युवाओं को देश की प्रगति को और गति देने के लिए आगे खड़े होना चाहिए।

पूर्व राष्ट्रपति को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए श्री नायडू ने युवाओं से डॉक्टर कलाम की पुस्तक से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और अपने भीतर विश्वास पैदा करने को कहा। उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी तलाश करने वालों की बजाय नौकरी देने वाला बनने के बारे में सोचना चाहिए।

प्राथमिक शिक्षा से ही शिक्षण को एक रोचक और दिलचस्प अनुभव बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था को उसके अनुकूल किए जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों में जिज्ञासु प्रवृत्ति और तार्किक चिंतन की परंपरा विकसित होनी चाहिए। इस दिशा में नई शिक्षा नीति एक बड़ा कदम है। उन्होंने आगे कहा कि इसमें अकादमिक शिक्षण और अन्य गतिविधियों का सांकेतिक एकीकरण किया गया है ताकि बच्चे का समग्रता में विकास हो सके।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम के युवाओं के मस्तिष्क को प्रेरित करने के जुनून को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह प्रायः विद्यालयों का दौरा करते थे और छात्रों से बात करते थे। उप राष्ट्रपतिने कहा कि उन्होंने कभी ना भुलाए जा सकने वाले अपने शब्दों, अपनी चुंबकीय उपस्थिति और एक गर्मजोशी वाली मुस्कान से हजारों छात्रों को प्रेरित किया।

समाज की भलाई के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने में पूर्व राष्ट्रपति के दृढ़ विश्वास का उल्लेख करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि वास्तव में हमारे अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखने का श्रेय डॉ कलाम को जाता है, जिस बुनियाद पर आज हमारे वैज्ञानिक और इंजीनियर आगे बढ़ रहे हैं।

उप-राष्ट्रपति ने कहा कि अपने भीतर पूर्ण विश्वास की डॉक्टर कलाम की विरासत ने हमारे वैज्ञानिकों को स्वदेशी टीका विकसित करने के लिए प्रेरित किया। यहाँ तक कि चिकित्सा उपकरणों की जहां कुछ दिन पहले तक कमी हुआ करती थी आज हम पीपीई किट्स से लेकर एन95 मास्क और वेंटिलेटर का दुनिया के दूसरे देशों को निर्यात कर रहे हैं। उप राष्ट्रपतिने कोविड-19 टीका विकसित करने के लिए सरकार और वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों के लिए सराहना की।

उन्होंने कहा कि इतने कम समय में वह भी इतनी सस्ती कीमत में टीका विकसित किया जाना “उल्लेखनीय उपलब्धि है”।

श्री नायडू ने कहा कि डॉ कलाम कभी हार न मानने और यहाँ तक कि विषम स्थितियों में समर्पण न करने की भावना के लिए सदा याद किए जाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी कार्यशैली अनुशासन, कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास से ओतप्रोत रही है।

इस अवसर पर पुस्तक की सह लेखिका और अब्दुल कलाम अंतर्राष्ट्रीय संस्थान (एआईकेएफ़) की प्रबन्धक न्यासी डॉ एपीजेएम नाज़ेमा मराईकयार, एमसीईटी (डॉ महालिंगम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलॉजी) के अध्यक्ष डॉ मणीक्कम, लेखक एवं कवि डॉ सिरपी बालासुब्रमण्यम और एकेआईएफ़ के सह संस्थापक श्री एपीजेएमजे शेख सलीम भी उपस्थित रहे।

उप-राष्ट्रपति के सम्बोधन का पूर्ण पाठ नीचे दिया गया है-

“प्रिय बहनों और भाइयों,

पुस्तक ‘अब्दुल कलाम-निनैवूगलुक्कू मारनामिल्लई’ के लोकार्पण के लिए आज आपके बीच उपस्थित होने पर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है।

इस पुस्तक की रचना डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की भांजी डॉक्टर एपीजेएम नजमा मरईकायर और डॉक्टर कलाम के करीबी मित्रों में एक जाने-माने अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ वाईएस राजन ने की है। मैं इस पुस्तक के रचनाकारों की सराहना करता हूँ।

इस पुस्तक के शीर्षक ‘निनैवूगलुक्कू मारनामिल्लई’ का अर्थ है अविस्मरणीय स्मृतियां। यह बेहद लोकप्रिय और बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक, देशभक्त, शिक्षाविद, प्रशासक, लोगों के राष्ट्रपति, एक महान व्यक्ति और सभी को प्रेरित करने वाले को याद करने के लिए अत्यंत उपयुक्त शीर्षक है। रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को सशक्त करने के लिए उनके द्वारा शुरू की गई नई पहल और उनके योगदान अतुलनीय हैं। इन सब उपलब्धियों के बावजूद वह एक ऐसे व्यक्ति रहे जिनमें सादगी, गर्मजोशी और ईमानदारी भरपूर थी।

मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे डॉक्टर कलाम से कई बार मिलने और बातचीत करने का मौका मिला, जब वह डीआरडीओ में थे और बाद में जब वह भारत के राष्ट्रपति बने। लेकिन मैं जब भी उनसे मिला उनकी सादगी, उनके अथाह ज्ञान और आम लोगों के जीवन में बदलाव के लिए उनकी गहरी रुचि ने मुझे सदैव आश्चर्यचकित किया।

मित्रों, महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि “मेरा जीवन ही मेरा संदेश है”, यह डॉ कलाम के साथ भी पूर्णतया तर्कसंगत है क्योंकि उन्होंने वही शिक्षा दी, वही कहा जिसका वह स्वयं अनुकरण करते थे। आज उनके प्रेरक शब्दों के लिए डॉ कलाम का प्रायः उल्लेख किया जाता है। लेकिन उन्हें वास्तव में समझने के लिए और उनके उन शब्दों के महत्व को समझने के लिए हमें उस जीवन को देखना और समझना होगा जिसने ऐसे शब्द और ऐसे विचार दिए। इसलिए मैं इस पर बात करूंगा कि डॉ कलाम ने अपने जीवन में क्या किया, बजाय इसके कि उन्होंने क्या-क्या कहा। हम इस महान विभूति के अच्छे गुणों से बहुत कुछ सीख सकते हैं कि कैसे उन्होंने जीवन में हर परिस्थिति का सहजता से सामना किया।

डॉ कलाम का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ। डॉ कलाम ने अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करने के लिए बाल्यकाल में अखबार बांटने का काम किया। यूं तो अपने स्कूल में वह एक औसत छात्र थे लेकिन उन्हें उनकी मेधा और उनके कठिन परिश्रम के लिए जाना जाता था, जो ज्ञान के लिए सदैव भूखे रहते थे। उनका जीवन के प्रति दृष्टिकोण सदा सकारात्मक रहा और उन्होंने कभी यह नहीं माना की समस्याएं अजेय हैं। यह जीवन जीने के कुछ ऐसे गुण है जिन्हें कोई भी अपने जीवन को बदलने के लिए आत्मसात कर सकता है।

प्रिय बहनों और भाइयों,

आज हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारा जनसांख्यिकीय लाभांश है। हमें कृषि से लेकर विनिर्माण तक सभी क्षेत्रों में प्रगति की रफ्तार को और बढ़ाने के लिए इसका पूर्ण रूप से लाभ उठाना चाहिए ताकि आने वाले वर्षों में एक टिकाऊ विकास दर हासिल की जा सके। यह ऐसा समय है जब देश के युवाओं को देश की विकास गाथा लिखने और विकास को गति देने के लिए आगे आना चाहिए।

मैं युवाओं से आग्रह करता हूँ की वे डॉ कलाम की पुस्तक से प्रेरणा लें और अपने में विश्वास पैदा करें। उन्हें नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बनने की महत्वाकांक्षा पालनी चाहिए। जैसा कि डॉ कलाम कहा करते थे कि “स्वप्न वह नहीं है जो आप सोते समय देखते हैं, स्वप्न वह है जो आपको सोने नहीं देता”। वह युवाओं से कहते थे “सफल लोगों की कहानियाँ मत पढ़ो, इससे आपको मात्र एक संदेश मिलेगा। असफल लोगों की कहानियाँ पढ़ो, आपको सफल होने के लिए नए विचार मिलेंगे।

डॉ कलाम प्रायः बच्चों को पहला वैज्ञानिक मानते थे क्योंकि बच्चे हर एक चीज के लिए प्रश्न करते हैं “क्यों?”। मेरा विश्वास है कि यह जिज्ञासा ही हर एक बच्चे की रचनात्मक क्षमता का द्वारा खोलती ही। शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की आवश्यकता पर मेरा सदैव ज़ोर रहा है ताकि प्राथमिक शिक्षा से ही पढ़ाई को एक रोचक अनुभव वाला बनाया जा सके। छात्रों को प्रश्न पूछने और तार्किक चिंतन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। नई शिक्षा नीति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अकादमिक शिक्षा और अन्य गतिविधियों का कृत्रिम एकीकरण करेगी ताकि बच्चों का समग्रता से विकास हो सके।

डॉ कलाम हर एक बच्चे में अंतर्निहित क्षमता में विश्वास करते थे। एक बार उन्होंने कहा था कि “राष्ट्र का सबसे अच्छा मस्तिष्क कक्षाओं में आखिरी बेंच पर बैठा मिलेगा”। उनका यह विचार संकेत करता है कि किसी भी बच्चे की क्षमता को कम करके नहीं आँका जाना चाहिए।

शायद भविष्य का वैज्ञानिक या भविष्य का राष्ट्रपति इन्हीं पीछे की बेंचों से निकल कर आए… कौन जनता है?

डॉ कलाम का एक गुण था कि उनमें भारत के युवाओं का मस्तिष्क को प्रज्वलित करने का जुनून था। जब वह वैज्ञानिक थे, जब वह राष्ट्रपति बने या जब उन्होंने राष्ट्रपति पद छोड़ा वह स्कूलों में जाते रहते थे और युवा छात्रों से बात करते रहते थे। युवा पीढ़ी के साथ बात करने की अपने इसी विचार के चलते ही अपनी सेवा निवृत्ति के बाद विभिन्न आईआईएम और प्रौद्योगिकी संस्थानों में अतिथि शिक्षकों के रूप में जाते रहे हैं। उन्होंने अपने कभी न भुलाए जा सकने वाले शब्दों, अपनी चुम्बकीय उपस्थिति और अपनी मधुर मुस्कान से हजारों छात्रों को प्रेरित किया।

पूर्व राष्ट्रपति समाज की भलाई के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में दृढ़ विश्वास रखते थे।

डॉ. कलाम को हमेशा उनकी अदम्य भावना और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानने के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने अपना जीवन सदैव अनुशासन, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ जि। भारत के स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान के विकास के साथ-साथ, उन्हें भारत के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम (आईजीएमडीपी) को विकसित किए का श्रेय भी दिया जाता है। वास्तव में, डॉ. कलाम को हमारे अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों में ‘आत्मनिर्भरता’ की मजबूत नींव रखने का श्रेय दिया जा सकता है, जिस पर आज हमारे वैज्ञानिक और इंजीनियर काम कर रहे हैं।

डॉ कलाम की अपने ऊपर विश्वास करने की विरासत ने हमें आज अपना टीका विकसित करने के लिए प्रेरित किया। यहाँ तक कि कुछ दिन पहले तक जहां चिकित्सा उपकरणों की कमी हुआ करती थी आज हम पीपीई किट्स से लेकर एन95 मास्क और वेंटिलेटर का दुनिया के दूसरे देशों को निर्यात कर रहे हैं। कोविड-19 का टीका विकसित करने के लिए सरकार और वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों के लिए मैं उनकी सराहना करता हूँ। कल से शुरू किए गए ऐतिहासिक टीकाकरण अभियान के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनायें।

राष्ट्रपति कार्यकाल डॉ कलाम के सार्वजनिक जीवन लिए सर्वोत्तम समय रहा, जिसने उन्हें अपने असाधारण विचारों को आम जनता के साथ साझा करने में मदद की। वह लगातार लोगों के बीच पहुँचते थे और सदा विनम्र एवं ज़मीन से जुड़े रहते थे। एक बार अपने केरल दौरे पर उन्होंने उस मोची को, जो उनके जूते ठीक करता था और एक छोटे से होटल, जहां वह अक्सर खाना खाया करते थे, के मालिक को राजभवन में आमंत्रित किया था। उनकी यही सादगी मानवता उन्हें लोगों सबसे लोकप्रिय बनाती हैं। जैसा कि पुस्तक में लिखा गया है, उनकी यादें वास्तव में अमर हैं।

लोगों में उनकी लोकप्रियता एक प्रमुख करण यह भी था कि उनकी उपलब्धियों का आसमान बहुत बढ़ा था। देश का प्रसिद्ध वैज्ञानिक होने के बावजूद उन्हें लिखने पढ़ने में आनद आता था। वह वीणा वादन करते थे, कर्नाटक भक्ति संगीत सुनते थे। उन्होंने आईआईएम और आईआईटी जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों में लेक्चर दिया, लेकिन वह ग्रामीण इलाकों के छोटे स्कूलों में भी जाते रहा करते थे।

प्रिय बहनों और भाइयों,

देश के विभिन्न भागों के अपने दौरों में, मैं विभिन्न संस्थानों में छात्रों से नियमित रूप से चर्चा करता रहा हूँ। मेरा दृढ़ विश्वास है कि इससे न सिर्फ मुझे अपने विचारों को लोगों के साथ साझा करने का अवसर मिलता है बल्कि देश के महत्वाकांक्षी युवाओं के विचार जानने का भी मौका मिलता है।

डॉ कलाम पर्यावरण के संरक्षण को लेकर सदैव संवेदनशील रहते थे। राष्ट्रपति भवन में उन्होंने औषधीय पौधों के एक हर्बल बगीचे तथा एक आध्यात्मिक बगीचे की शुरुआत की, जो हजारों दर्शकों विशेषकर छात्रों को आकर्षित करता है। आईआईएम शिलोंग में अपने आखिरी लेक्चर में “एक रहने योग्य ग्रह पृथ्वी की रचना” शीर्षक के अंतर्गत चेताया था कि विकास के नाम हमारी भूख ने पृथ्वी के पूरे पारिस्थिकी तंत्र को चोट पहुंचाई है।

मित्रों, हमें सदा यह याद रखना चाहिए कि विकास और पर्यावरण का संरक्षण साथ-साथ होता रहे। हमें प्रकृति के साथ साहचर्य के भाव से रहना चाहिए और हमें प्रकृति को किसी भी तरह क्षति पहुँचने का अधिकार नहीं है। मुझे प्रसन्नता है कि अब्दुल कलाम इंटेरनेशनल फाउंडेशन वानिकी जैसी परियोजनाओं के जरिये उनके कार्यों को जारी रखे हुए है।

भाई और बहनों,

डॉ कलाम की लिखी किताबें युवाओं और वरिष्ठों में समान रूप से लोकप्रिय हैं।

मुझे बताया गया है कि उनकी इस जीवनी में डॉ कलाम के पारिवारिक जड़ों और उनके छात्र जीवन समेत सम्पूर्ण जीवन यात्रा को समेटा गया है। उनके जीवन से जुड़े कई दृष्टांत परिवार के दृष्टिकोण के अनुरूप प्रस्तुत किए गए हैं। डॉ वाई एस राजन के योगदान के चलते महान व्यक्तित्व के धनी डॉ कलाम के एक महान प्रशासक जैसे गुणों से भी लोगों के रूबरू होने का अवसर मिलेगा। मैं लेखकों को इस पुस्तक की रचना और डॉ कलाम के बारे में हमें और अधिक जानने का असर देने के लिए बधाई देता हूँ।

एक बार फिर से मैं कहना चाहूँगा कि इस पुस्तक का अनावरण करने का अवसर प्राप्त होने को लेकर मैं प्रसन्न हूँ।

इस पुस्तक के लेखकों, अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन और डॉ कलाम के परिवार को मेरी शुभकामनायें। धन्यवाद