January 29, 2022

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बिहार की बेटी साक्षी को TCS देगा लाखों की सैलरी, गुरु RK श्रीवास्तव को दिया सफलता का श्रेय

पटना डीवीएनए। साक्षी अभी 7 वीं सेमेस्टर में है और इसी बीच उसका सेलेक्शन बहुराष्ट्रीय कंपनी टीसीएस में असिस्टेंट सिस्टम इंजीनियर के पद पर हो गया। साक्षी ने अपने सफलता का श्रेय अपने गुरु आरके श्रीवास्तव को दिया।

गरीब स्टूडेंट्स को निःशुल्क शिक्षा देकर इंजीनियर बना रहे बिहार के आरके श्रीवास्तव। आपको बताते चले कि बिहार के आरके श्रीवास्तव सैकङो गरीबों को आईआईटी, एनआईटी, बीसीईसीई सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानो मे दाखिला दिलाकर उनके सपने को पंख लगा चुके है।

रोहतास के जमोढी गांव निवासी आरके श्रीवास्तव डीवीएनए से बातचीत में बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गणित में बहुत अधिक रुचि थी जो नौंवी और दसवी तक आते-आते परवान चढ़ी। आर के श्रीवास्तवा की बचपन भी काफी गरीबी से गुजरा है। परन्तु अपने कड़ी मेहनत, उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर आज देश मे मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर है, वे कहते हैं कि मेरे जैसे देश के कई बच्चे होंगे जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते।आर के श्रीवास्तवा अपने छात्रों में एक सवाल को अलग-अलग मेथड से हल करना भी सिखाते हैं।

आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक कार्यशैली के तहत बढती लोकप्रियता ने बढ़ाया बिहार का मान सम्मान। अपने कड़ी मेहनत, उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर बन चुके है लाखो युवायो के रॉल मॉडल। देश के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके है आर के श्रीवास्तव के शैक्षणिक कार्यशैली की प्रशंसा । शैक्षणिक मीटिंग के दौरान मैथेमैटिक्स गुरू के नाम से महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके है सम्बोधित।

आरके श्रीवास्तव ने युवाओ को हमेशा बताया की “जीतने वाले छोङते नही, छोड़ने वाले जीतते नही ” के मार्ग पर हमेशा आगे बढ़े । आपको सफलता पाना है तो कई असफलता के बाद भी अपने लक्ष्य को छोडे नही उसे पाने के लिये निरंतर परिश्रम करते रहे आपको एक दिन सफलता जरुर मिलेगी। देश के अलग-अलग राज्यो के शैक्षणिक एवं समाजिक कार्यक्रमो मे अपने सम्बोधन से बिहार के मान सम्मान को हमेशा आगे बढ़ाते रहा है यह बिहारी गुरू।

शिक्षा के तहत रास्ट्र निर्माण मे नि:स्वार्थ योगदान वाले ऐसे सारे गुरुओ को सलाम है । आपको बताते चले की बिहार आदिकाल से ही महापुरुषो की भूमि रही है । जिन्होने हिंदुस्तान सहित पूरे विश्व को मार्ग दिखाया।

तब आसमा भी आयेगी जमी पे, बस इरादों में जीत का जुनून चाहिए। आज इन्ही पंक्ति को जीवंत कर रहे मैथमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तवा। निर्धन छात्रों के इरादों को सम्बल प्रदान कर उनके सपनो को साकार किया है। बिक्रमगंज जैसे छोटे शहर में आरके श्रीवास्तवा ने कई निर्धन छात्रों को निःशुल्क पढ़ा आईआईटी ,एनडीए और अन्य इंजिनयरिंग कॉलेजों में दाखिला के लिये कामयाब किया।

साक्षी की चयन से पिता चंद्रमोहन चौधरी और मां बहुत खुश हैं। पक्के इरादे और मजबूत जुनून के साथ लक्ष्य निर्धारित कर प्राप्ति के लिए किए गए सार्थक प्रयास निश्चित ही सफलता के सीढ़ी बनते हैं।जिसे बिक्रमगंज प्रखंड के नोनहर निवासी चंद्रमोहन चौधरी की पुत्री साक्षी ने चरितार्थ करने का काम किया है।

सरकारी विद्यालय में अध्ययन के बाद साक्षी का नामांकन इंजीनियरिंग कॉलेज गया में हुआ।अंतिम सेमेस्टर की पढ़ाई पूर्ण होने के पूर्व ही साक्षी ने अपने परिश्रम का परचम लहराने में सफलता प्राप्त कर लिया। लोगों को यह महसूस नहीं हो रहा था कि यह बेटी ग्रामीणों का सिर गर्व से ऊंचा कर देगी।माता सुभान्ति देवी के संरक्षण में साक्षी कुमारी की परवरिश गांव और स्थानीय बाजार तक सिमटी रही।