January 21, 2022

DVNA

Digital Varta News Agency

बाल आयोग ने कहा- भीख मांगने वाले बच्चे किए जाएं पुनवार्सित

आगरा। (डीवीएनए )बाल भिक्षावृत्ति को लेकर बाल आयोग सख्त है। आयोग ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए है कि भीख मांगने वाले बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर पुनर्वासित करके अपराधियों के विरूद्ध मुकद्मा दर्ज कर कार्यवाही की जाए। आगरा के बाल अधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस के पत्र पर आयोग ने संज्ञान लिया है।

नरेश पारस भिक्षावृत्ति के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है। इस अभियान को पुलिस विभाग ने गंभीरता से लिया है। डीजीपी के आदेश पर पिछले 15 दिनों से लगातार अभियान चलाकर भिक्षावृत्ति कराने वाले बच्चों को मुक्त कराया जा रहा है। नरेश पारस ने करके मुक्त कराए गए बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर पुनर्वासित कराने और भीख मंगवाने वालों के विरूद्ध कार्यवाही की मांग बाल आयोग से की थी।

चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट एवं महफूज संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने आगरा के एमजी रोड का सर्वे कर 45 बच्चों की सूची पुलिस प्रशासन को सौंपी थी। जिसके बाद पुलिस ने अभियान चलाकर लगभग पांच दर्जन बच्चों को रेस्क्यू किया लेकिन सरकारी योजना से किसी को नहीं जोड़ा और न किसी के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही हुई। मुक्त कराए बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर पुनर्वासित करने और भीख मंगवाने वालों के खिलाफ मुकद्मा दर्ज कराने की मांग राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से की। आयोग के अध्यक्ष डाॅ.विशेष गुप्ता ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर पुनर्वासित करने तथा अपराधियों के विरूद्ध मुकद्मा दर्ज कराने के आदेश जारी किए हैं।

नरेश पारस ने कहा कि मुक्त कराए बच्चों का पुनर्वास जरूरी है। भीख मंगवाने वाले अपराधियों के विरूद्ध मुकद्मा दर्ज होने से भिक्षावृत्ति के मामलों में कमी आएगी। अधिकांश बाहरी जनपदों से बच्चों को लाकर भीख मंगवाई जा रही है। इसमें किसी गिरोह की आशंका है। इसको तोड़ना जरूरी है।

अभियान के बाद भिखारियों ने अपने ठिकाने बदल दिए हैं। वह अन्य चैरोहो पर भिक्षावृत्ति कर रहे हैं। बच्चों तथा महिलाओं से भिक्षावृत्ति कराई जा रही है। महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर भीख मांगती हैं तथा 8-12 वर्ष की आयु के बच्चों से चैराहों पर भीख मंगवाई जा रही है। बकायदा उनको भीख मांगने की टिप्स दी जाती हैं तथा स्पाॅट दिए जाते हैं। हर बच्चे के गले में एक कपड़े का थैला लटका रहता है। जिसमें वह भीख के पैसे रखते हैं। बाद में एक व्यक्ति उनसे पैसों का कलेक्शन करता है। मजबूरी के साथ-साथ भीख मंगवाने वाला गिरोह भी सक्रीय हो सकता है। फोटो खींचने पर बच्चे तथा महिलाएं चेहरा छुपा लेते हैं। भाग जाते हैं। कुछ शारीरिक विकलांगता का नाटक करते हैं। आगरा एक पर्यटन नगरी है। यहां देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। उनकी गाड़ियों से जब बच्चे भीख मांगते हैं तो उनके सामने शहर की छवि अच्छी नहीं जाती है।
संवाद , दानिश उमरी