January 21, 2022

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Digital Varta News Agency

पुलिस वर्दी में आत्मसमर्पण करने पहुंचा था गैंगस्टर विकास का भाई दीपक दुबे

लखनऊ (डीवीएनए)। कुख्यात विकास दुबे का भाई न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के लिए पुलिस की वर्दी में पहुंचा था। आरोपित ने टोपी भी लगाई थी। हालांकि उसने पुलिस का बैज, लोगो और बेल्ट नहीं पहना था। पहले दिन पुलिस के सतर्क हो जाने पर वह पुलिसकर्मियों की आंख में धूल झोंककर उन्हीं के सामने से निकल गया था। हालांकि दूसरे दिन दीप प्रकाश उर्फ दीपक दुबे ने दोबारा वेश बदलकर गेट नम्बर आठ से दोबारा प्रवेश किया और न्यायालय में समर्पण कर दिया था।
जेल में पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपित ने सारी बात बताई है। आरोपित ने बताया कि वह पहले दिन असफल होने पर अगले दिन मंकी कैप और मोटी जैकेट पहनकर कोर्ट परिसर में पहुंचा था। इस दौरान पुलिसकर्मी उसे पहचान नहीं सके और आसानी से उसने समर्पण कर दिया था। फिलहाल कृष्णानगर पुलिस आरोपित के बयान दर्ज कर रही है। हालांकि अभी तक पुलिस आरोपित के नाम से दर्ज असलहे को बरामद नहीं कर सकी है। पुलिस उसी प्रतिबंधित असलहे की तलाश में है, जिसके साथ वर्ष 2017 में विकास दुबे पकड़ा गया था। विकास के खिलाफ आम्र्स एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी। इसी मामले में शिथिल पर्यवेक्षण के कारण एसआइटी ने तत्कालीन इंस्पेक्टर कृष्णानगर को लघु दंड का दोषी माना है, जिसपर कार्यवाही प्रचलित है। पुलिस को चकमा देकर दीप प्रकाश ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद माना जा रहा था कि आरोपित को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया जाएगा। हालांकि अभी तक पुलिस दीप प्रकाश की कस्टडी रिमांड नहीं ले पाई है।
सूत्रों के मुताबिक आरोपित दीप प्रकाश पुलिस को लगातार गुमराह कर रहा है। वह कहां छिपा रहा, किन लोगों ने उसकी मदद की और कैसे उसने आत्मसमर्पण किया, इन सभी बिंदुओं पर आरोपित गोलमोल जवाब दे रहा है। यहां तक की पुलिस को वह अपने लाइसेंसी असलहे के बारे में भी जानकारी नहीं दे रहा। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपित के नाम से दर्ज असलहे को बरामद कर लिया जाएगा। गैंगेस्टर विकास दुबे ने दो जुलाई की रात कानपुर के बिकरु गांव में दबिश पर गए पुलिसकर्मियों पर साथियों संग हमला बोल दिया था।