June 17, 2021

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किसान जागरूक होकर आलू की फसल को रोग से बचायें

कासगंज। (डीवीएनए ) ठण्डे मौसम का प्रभाव फसलों पर भी पड़ रहा है। पाला, कोहरा, बूंदाबांदी तथा नम वातावरण में आलू की फसल पर अगैती पछैती लसा रोग लगने की संभावना है। ऐसे दशा में उद्यान विभाग द्वारा कृषि रक्षा रसायनों का छिड़काव करने की सलाह दी जा रही है। किसान जागरूक होकर आलू की फसल को रोग से बचायें।
जिला उद्यान अधिकारी योगेश कुमार ने बताया कि अगैती झुलसा रोग का प्रकोप निचली पत्तियों से प्रारंभ होता है, जिसके कारण गहरे भूरे काले रंग के छल्लेनुमा धब्बे बनते हैं। पछैती झुलसा रोग से पत्तियां सिरे से गिरना प्रारंभ होती हैं। यह रोग तीव्रता से फैलता है। तीन, चार दिन में ही सम्पूर्ण फसल नष्ट हो जाती है।
आलू फसल के अगैती, पछैती झुलसा रोग से बचाव हेतु जिंक मेन्कोजेब कार्वामेट 2 से 2.50 कि0ग्रा0 को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेअर की दर से पहला रक्षात्मक छिड़काव बुवाई के 30 से 35 दिन के अन्दर अवश्य करें। दूसरा एवं तीसरा छिड़काव कापर आक्सीक्लोराइड 2.5 से 3 कि0ग्रा0 अथवा जिंक कार्वामेट 2 से 2.5 कि0ग्रा0 में से कोई एक रसायन को 1000 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेअर की दर से 10-12 दिनों के अन्तर पर करें। दूसरे एवं तीसरे छिड़काव में फफूंदी नाशक के साथ माहू कीट के नियंत्रण हेतु कीटनाशक रसायन जैसे मिथाइल ओ0डेमेटान 25 ईसी 10 लीटर या डाईमेथोएट 30 ईसी 10 लीटर या मोनोक्रोटोफास 36 ईसी की 750 मिली0 को प्रति हेक्टेअर की दर से मिलाकर छिड़काव करें।
संवाद , नूरुल इस्लाम