घर की बाड़ी के पीछे लगाये गुलाब, गौठान में गुलाबजल यूनिट डाल ली

 
pic

दुर्ग :  पतोरा की स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने गुलाबजल का उत्पादन आरंभ कर नई मिसाल अन्य समूहों के लिए कायम की है। परंपरागत उत्पादों के विक्रय के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है इसलिए उन्होंने बिल्कुल नये उत्पाद का चुनाव किया जिसका स्थानीय स्तर पर उत्पादन बिल्कुल नहीं है और लाजिस्टिक की वजह से यहां तक आने वाली सामग्री काफी महंगे दामों में स्थानीय उपभोक्ताओं को मिल पाती है। गुलाब जल के उत्पादन के बारे में और विक्रय के बारे में सोचना कठिन था यह संभव हो सका जिला प्रशासन द्वारा दिये गये प्रोत्साहन से। एकता स्वसहायता समूह की अध्यक्ष  प्रेमलता साहू ने बताया कि जिला पंचायत के अधिकारियों ने हमें कहा कि हमें परंपरागत  उत्पादों से परे ऐसे उत्पाद भी बनाना चाहिए जिनकी बाजार में बड़ी जरूरत हो। हमने उनसे सुझाव माँगे। उन्होंने कहा कि गुलाब जल, तुलसी अर्क और गौअर्क आदि का उत्पादन हो सकता है और सीमार्ट के माध्यम से इसकी बिक्री संभव है। जिला प्रशासन ने इसके लिए तकनीकी मदद भी देने की बात कही। फिर यह कार्य शुरू हो गया। 

प्रेमलता ने बताया कि हमारा गुलाबजल मार्केट के रेट से दस रुपए कम है और गुणवत्ता में किसी तरह की कमी नहीं है। सी-मार्ट के माध्यम से हम लोग इसकी बिक्री करेंगी। जिला पंचायत सीईओ  अश्विनी देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की मंशानुरूप कलेक्टर  पुष्पेंद्र कुमार मीणा के मार्गदर्शन में आजीविकामूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। कोशिश यह है कि हर गौठान कुछ ऐसे उत्पादों का निर्माण करें जिनकी मार्केट में अच्छी माँग हो और स्थानीय स्तर पर इसका उत्पादन कम हो। पतोरा की महिलाओं ने गुलाबजल आदि वस्तुओं का उत्पादन शुरू किया है। कास्मेटिक्स के बाजार में इसकी अच्छी माँग है। समूह की सदस्य द्रौपदी साहू ने बताया कि सी-मार्ट में इसका डिस्प्ले करेंगे। शहर में सबसे अच्छी जगह में हमारा उत्पाद बिकेगा। चूंकि हमने पैकिंग में और निर्माण में क्वालिटी का पूरा ध्यान रखा है अतएव उम्मीद है कि हमारा यह प्रयास सफल होगा। उल्लेखनीय है कि गुलाब जल के लिए गुलाब इन महिलाओं ने अपनी ही बाड़ी से लिए हैं। गुलाब के पौधे इन्होंने लगाये हैं। अब चारागाह में भी बड़े पैमाने  पर गुलाब के पौधे लगाने की तैयारी में समूह की महिलाएं हैं। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर  मीणा ने कल पतोरा में इन महिलाओं द्वारा किये जा रहे कार्य को देखा और सराहा। उन्होंने कहा कि नवाचार करने से और लगातार इस दिशा में बढ़ने से जरूर सफलता मिलती है। आजीविकामूलक गतिविधियों का जितना वैविध्य होगा, महिला समूहों की आय उतनी ही बढ़ेगी।

From Around the web