समृद्धि और स्वावलंबन के स्त्रोत बनते गौठान

 
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कोरिया : छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरूवा, बाड़ी और गोधन न्याय योजना के तहत जिले में गौठानों का निर्माण किया गया है। यहां महिला समूहों को जोड़ते हुए उन्हें विभिन्न आजीविका गतिविधियों से रूबरू कराया गया। शासन के इस कदम का परिणाम है कि जिले में 195 गौठानों और गौठान से भिन्न मल्टी एक्टीविटी सेंटर में 329 महिला स्व-सहायता समूहों के द्वारा सामुदायिक बाड़ी, मशरूम उत्पादन, दाल मिल, चप्पल निर्माण, चैन लिंक फेंसिंग, फ्लाई ऐश ईंट निर्माण, कोदो चावल प्रोसेसिंग, एलईडी बल्ब, पेवर ब्लॉक निर्माण आदि आजीविका गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और इन गतिविधियों से समूहों द्वारा 2 करोड़ 25 लाख रूपये से ज्यादा का टर्नओवर विक्रय किया जा चुका है। 


जिला प्रशासन के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के माध्यम से गौठानों में कार्य करने वाली स्व सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न सामग्री तैयार करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्व सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादकों को उचित प्लेटफॉर्म देने और स्थानीय उत्पादों, परंपरागत व्यंजनों, परिधानों को एक अवसर मुहैया कराने शासन की मंशा अनुरूप जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में छत्तीसगढ़ मार्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। महिलाएं अपने हाथों से बनाए गए सामग्री और गौठानों में उत्पादित सामग्रियों का विक्रय सी-मार्ट के माध्यम से करती हैं। शुरूआत के महज दो महीने से भी कम समय में सी-मार्ट के जरिए 14 लाख 13 हजार रूपये के उत्पादों का विक्रय किया गया है।


गौठानों को ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में किया जा रहा विकसित
गौठानों को ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने के लिए जिले में 05 ईकाईया तैयार हैं जिनमें आलू चिप्स यूनिट, लकरा जूस, दोना पत्तल निर्माण, टेराकोटा सामग्री, जीराफूल चावल, बेकरी उत्पाद, कैटल फीड, रूई, शहद, झाड़ू निर्माण जैसी गतिविधियां शुरू की जा रही हैं। आगामी कार्ययोजना के तहत कुल 25 गौठानों को ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित किये जाने हेतु चयन किया गया है जहां 550 से अधिक हिताग्राहियों को रोजगार से जोड़े जाने का लक्ष्य रखा गया है।

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