म.प्र. पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने जारी किया प्रथम प्रतिवेदन

 
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भोपाल :  राज्य शासन द्वारा गठित म.प्र. पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने आज प्रथम प्रतिवेदन जारी किया। आयोग के अध्यक्ष  गोरीशंकर बिसेन, सदस्य विधायक  कृष्णा गौर एवं  प्रदीप पटेल तथा नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल ने मीडिया प्रतिनिधियों को आयोग द्वारा पिछड़ा वर्ग के लिये की गई अनुशंसाओं की जानकारी दी।

आयोग के अध्यक्ष  बिसेन ने बताया कि म.प्र. पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग द्वारा की गई अनुशंसाओं का प्रतिवेदन सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को प्रस्तुत किया जाएगा।

आयोग के "प्रथम प्रतिवेदन" 05 मई 2022 का सारांश

आयोग के प्रथमतया विश्लेषण से स्पष्ट है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता लगभग 48 प्रतिशत है। अभी और शोध एवं अनुसंधान कार्य शेष है। मध्यप्रदेश में कुल मतदाताओं में से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के मतदाता घटाने पर शेष मतदाताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता 79 प्रतिशत है।

आयोग ने अपने विश्लेषण में पाया है कि वयस्क मताधिकार प्राप्त हुए लगभग 70 वर्ष हो चुके हैं, फिर भी आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन के कारण आज भी अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए ऐसी बाधाएँ हैं, जिसको प्रतिवेदन में विस्तृत में दर्शाया गया हैं, जो उन्हें राजनैतिक समानता पाने से रोक रही हैं। इस कारण जनसंख्या के अनुपात में राजनैतिक प्रतिनिधित्व नगरीय निकाय एवं पंचायतों में काफी कम है।

आयोग के द्वारा किए गए अनुसंधान एवं शोध कार्य, विश्लेषण तथा जिलों में भ्रमण के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग के विभिन्न सामाजिक एवं स्वयं सेवी संगठनों से आयोग को प्राप्त ज्ञापन एवं मांग-पत्रों की समीक्षा के आधार पर आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए अपने प्रथम प्रतिवेदन में निम्न अनुशंसाएँ की हैं:-

 राज्य सरकार त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों के सभी स्तरों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कम से कम 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित करे।

 राज्य सरकार समस्त नगरीय निकाय चुनावों के सभी स्तरों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कम से कम 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित करे।

 त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों एवं नगरीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण सुनिश्चित किये जाने हेतु संविधान में संशोधन करने के लिए राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाये।

 राज्य शासन द्वारा सर्वे उपरांत चिन्हांकित कर जनसंख्या के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग बहुल जिला एवं ब्लॉक को "अन्य पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्र" घोषित किया जाये तथा उन क्षेत्रों में विकास की विभिन्न योजनाएँ लागू की जाये, बस्ती विकास जैसे कार्य किए जायें।

 मध्यप्रदेश राज्य की पिछड़ा वर्ग की सूची में से जो जातियाँ केन्द्र की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित नहीं है, उन जातियों को केन्द्र की सूची में जोड़े जाने का प्रस्ताव मध्यप्रदेश शासन द्वारा केन्द्र शासन को प्रेषित किया जाये।

 केन्द्र की पिछड़ा वर्ग की सूची में से जो जातियाँ मध्यप्रदेश राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित नहीं है, मध्यप्रदेश शासन द्वारा उन जातियों को राज्य की सूची में जोड़ा जाए।

 आयोग को जिलों से भ्रमण के दौरान 82 सामाजिक संगठनों से ज्ञापन-पत्र प्राप्त हुए।

 mp.mygov.in site पर 853 सुझाव मिले।

 mail पर 156 से ज्यादा सुझाव/ ज्ञापन प्राप्त हुए।


 

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