CM चौहान की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक

 
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भोपाल :  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में 1 अप्रैल, 2021 से 30 जून, 2021 तक की अवधि के लिए यात्री बसों पर देय 103 करोड़ 50 लाख रूपये के मासिक वाहन कर को पूर्णतः माफ किये जाने का निर्णय लिया गया। उक्त अवधि में कोविड-19 के दौरान प्रदेश में बसों का सुचारू संचालन बाधित रहा है।  

मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा (प्रसूति सहायता) योजना

      मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा (प्रसूति सहायता) योजना में अधिक से अधिक हितग्राहियों के पास गर्भावस्था के समय पोषण के लिए राशि उपलब्ध हो एवं गर्भावस्था की जाँच निर्धारित समय में कराई जाये, इसके दृष्टिगत योजना में प्राप्त होने वाली किश्तों की समयावधि में परिवर्तन करने का निर्णय लिया। योजना में प्रथम किश्त जो 4 प्रसव पूर्व जाँच कराने पर मिलती है, को परिवर्तित करते हुए महिला के गर्भधारण के प्रथम त्रैमास (गर्भावस्था के प्रथम 3 माह में) अथवा अपरिहार्य कारणों से गर्भावस्था के 4 माह तक पंजीयन कराते समय ही उपलब्ध कराई जायेगी। साथ ही द्वितीय किश्त जो शासकीय स्वास्थ्य संस्था में ही प्रसव कराये जाने के बाद देय होती है, को परिवर्तित करते हुए अब श्रमिक संवर्ग के उन पंजीकृत हितग्राहियों को भी प्रदान की जायेगी, जिनका प्रसव शासकीय चिकित्सालय के अतिरिक्त आयुष्मान भारत कार्यक्रम में प्रसव सेवाओं हेतु अधिकृत किए गए किसी अशासकीय चिकित्सालय में होता हैं। मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा (प्रसूति सहायता) योजना श्रमिक संवर्ग के परिवार की महिलाओं को निर्धारित अवधि में प्रसव पूर्व सेवाएँ प्राप्त करने, संस्थागत प्रसव हेतु प्रोत्साहित किए जाने, पोषण स्तर में सुधार तथा मजदूरी की क्षतिपूर्ति आदि के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2018 से लागू की गई है। यह योजना राज्य शासन द्वारा वित्त पोषित है।

मानदेय में वृद्धि

मंत्रि-परिषद ने शासन संधारित मंदिरों के पुजारियों/सेवादारों के मानदेय में वृद्धि किये जाने के संबंध में विभाग द्वारा 26 मई 2022 को जारी आदेश का अनुसमर्थन किया। वे पुजारी जिनके मंदिरों की कोई कृषि भूमि नहीं है, उनका मानदेय 3 हजार रूपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 5 हजार रूपये प्रतिमाह किया गया। पाँच एकड़ तक की कृषि भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों का मानदेय 2100 रूपये प्रतिमाह से बढाकर 2500 रूपये प्रतिमाह किया गया। पाँच एकड़ से दस एकड़ तक कृषि भूमि वाले मंदिरों के पुजारियों का मानदेय 1560 रूपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2 हजार रूपये प्रतिमाह किया गया। जिन मंदिरों के पास दस एकड़ से अधिक कृषि भूमि है, उन मंदिरों के पुजारियों को अलग से शासन से कोई मानदेय नहीं दिया जायेगा। पुजारी के मानदेय में वृद्धि दिनांक 01 मई, 2022 से प्रभावशील होगी।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0

मंत्रि-परिषद ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)-2.0 के मध्यप्रदेश में संचालन के संबंध में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा  20 मई 2022 को जारी आदेश का अनुसमर्थन किया। मिशन (शहरी)-2.0 में मध्यप्रदेश के सभी निकायों को सम्मिलित किया गया है। इसमें नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हेतु संवहनीय प्रयासों के साथ, स्वच्छता अधो-संरचनाओं का विकास किया जाएगा। मिशन का कार्यकाल 1 अक्टूबर 2021 से 1 अक्टूबर 2026 तक, आगामी 05 वर्षों के लिए होगा, जिसमें विभिन्न घटकों में 2200 करोड़ 20 लाख रूपये केन्द्रांश, राज्यांश राशि अनुमानत: 1800 करोड़ 22 लाख रूपये और निकाय अंशदान अनुमानत: राशि 913 करोड 32 लाख रूपये होगी।  इस प्रकार कुल राशि 4,913 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय अनुमानित है। इस राशि का प्रयोग प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में व्यक्तिगत, सार्वजनिक शौचालय एवं यूरीनल्स निर्माण, उपयोगिता जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सूचना, शिक्षा और संचार के साथ क्षमतावर्धन मद में किया जाएगा। मिशन के संचालन के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग को अधिकृत किया गया है।

उद्योगों के लिए भूमि उपलब्धता

मंत्रि-परिषद ने औद्योगिक क्षेत्र टेक्सटाईल पार्क अचारपुरा, जिला भोपाल की भूमि विविध उद्योगों के लिए उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया है।  भोपाल के आसपास विकसित भू-खण्ड की अधिक मांग को देखते हुए टेक्सटाईल पार्क अचारपुरा की स्थापना के लिये आरक्षित भूमि, बहुउत्पाद उद्योगों की स्थापना के लिए बहुउत्पाद औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया जायेगा।

सौर ऊर्जा परियोजना के लिए भूमि की अनुमति

वर्ष 1991 में केन्द्र सरकार द्वारा जारी नीति में मेसर्स एस्सार पॉवर लिमिटेड द्वारा 330 मेगावाट क्षमता की ड्यूल फ्यूल आधारित कम्बाइंड साइकिल विदयुत परियोजना की स्थापना तहसील भांडेर, जिला दतिया में प्रस्तावित की गई थी। देश में घरेलू गैस की अनुपलब्धता के कारण परियोजना स्थापना की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। इस परियोजना हेतु मेसर्स एस्सार के पास कुल 105.451 हेक्टेयर भूमि (102.52 हेक्टेयर अधिग्रहित एवं 2.931 हेक्टेयर आवंटित) भूमि उपलब्ध है। मेसर्स एस्सार पावर लिमिटेड द्वारा 83 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना हेतु उपलब्ध भूमि उनके ग्रुप द्वारा गठित एसपीव्ही को सब-लीज पर देने एवं भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति चाही गई है।

मंत्रि-परिषद् ने कुल 83 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना हेतु उपलब्ध भूमि में से 45.414 हेक्टेयर अधिग्रहित भूमि 31.5 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना स्थापना हेतु एस्सार ग्रुप द्वारा गठित एस.पी. व्ही. मेसर्स कुमुदिनी पॉवर लिमिटेड को और 57.106 हेक्टेयर अधिग्रहित भूमि, 51.5 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना स्थापना हेतु एस्सार ग्रुप की एक अन्य एस. पी. व्ही. मेसर्स इन्टीग्रेट ऑफशोर प्राइवेट लिमिटेड को सब लीज पर देने का अनुमोदन किया। साथ ही आवंटित 2.9 हेक्टेयर राजस्व भूमि के उपयोग परिवर्तन की अनुमति प्रदान की गई। यह अनुमति इस शर्त पर दी गई है कि प्रस्तावित 83 मेगावाट सौर परियोजना से 10 प्रतिशत विदयुत 25 वर्ष की अवधि हेतु परियोजना स्थापना से तीन वर्ष पूर्व तक मध्यप्रदेश में प्रतिस्पर्धात्मक निविदा में प्राप्त न्यूनतम सौर ऊर्जा दर पर क्रय करने का प्रथम अधिकार एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड का रहेगा।

इंदौर मे टॉय क्लस्टर

मंत्रि-परिषद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा क्लस्टर एसोसिएशन से प्रस्तावित 20 टॉय विनिर्माण इकाइयों (मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सफेद श्रेणी में वर्गीकृत विनिर्माण इकाइयाँ) को प्रचलित भू-आवंटन नियम के भाग-1 औद्योगिक भूमि एवं भवन आवंटन नियम की कंडिका 12 में विकसित एवं विकसित किये जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में औद्योगिक भू-खण्डों का आवंटन इलेक्ट्रॉनिक नीलामी पद्धति से किये जाने संबंधी प्रावधान को शिथिल करते हुए सीधे भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया।  भारतीय खिलौना बाजार की बढ़ती मांग तथा देश में खिलौना विनिर्माण एवं बाजार का परिदृश्य एवं संभावनाएँ के दृष्टिगत निर्णय लिया गया।

क्लस्टर अंतर्गत स्थापित की जाने वाली इकाइयों हेतु तल क्षेत्र अनुपात (FAR) 2 (दो) प्रदान किया जायेगा। स्थापित होने वाली इकाइयों को मध्यप्रदेश एमएसएमई विकास नीति, 2021 के अनुक्रम में फर्नीचर, टॉयस एवं उनसे संबंधित मूल्य श्रृंखला के उत्पादों की विनिर्माण इकाइयों के लिये विशिष्ट वित्तीय सहायता अंतर्गत रोजगार सृजन अनुदान का लाभ शर्तों के अध्याधीन दिया जायेगा। औद्योगिक क्षेत्र राऊ रंगवासा, जिला इन्दौर में विकसित बुनियादी अधोसंरचना यथा विदयुत/जल आपूर्ति एवं सड़क आदि का व्यय विभाग द्वारा वहन किया जायेगा। परियोजना में सामान्य सुविधा केन्द्र (CFC)की स्थापना भारत सरकार की एमएसई - सीडीपी योजना अथवा अन्यथा प्रस्तावित किये जाने के लिए प्रशासकीय विभाग को अधिकृत किया गया है। 

बुरहानपुर में टेक्सटाईल क्लस्टर

मंत्रि-परिषद ने एमएसएमई के औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन एवं प्रबंधन नियम, 2021 में कलस्टर विकास हेतु इच्छुक विकासकों से आवेदन प्राप्त करने की निर्धारित प्रक्रिया को शिथिल करते हुए एसपीव्ही को टेक्सटाईल क्लस्टर विकसित करने के लिये सुखपुरी, जिला बुरहानपुर में स्थित एमएसएमई विभाग के आधिपत्य की 63.06 हेक्टेयर अविकसित शासकीय भूमि पर विकास की अनुमति देने का निर्णय लिया। साथ ही क्लस्टर अंतर्गत स्थापित औद्योगिक व्यवसायिक इकाइयों से विकास शुल्क तथा संधारण शुल्क लिये जाने के अधिकार तथा प्रस्तावित क्लस्टर को तीन चरणों में विकसित करने की अनुमति प्रदान की हैं। मंत्रि-परिषद ने राज्य शासन के आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश 2023 दृष्टिपत्र में प्रदेश में 10 नवीन विनिर्माण क्लस्टर की स्थापना संबंधी संकल्प तथा प्रस्तावित क्लस्टर से बड़ी संख्या में रोजगार सृजन एवं वृहद निवेश के दृष्टिगत यह निर्णय लिया है।

एसपीव्ही को क्लस्टर विकास के लिए यथानुपात (Pro-rata) आधार पर कुल विकास लागत की 60 प्रतिशत की दर से अधिकतम रूपये 20 करोड़ सहायता/अनुदान, क्लस्टर में स्थापित होने वाली इकाइयों को शर्तों के अधीन बैंक/वित्तीय संस्थाओं से लिए जाने वाले मियादी ऋण (Term loan) पर 2 प्रतिशत की दर से 5 वर्षों के लिये अधिकतम 5 करोड़ रूपये ब्याज अनुदान दिया जायेगा। साथ ही क्लस्टर स्थल पर 33/11 के.व्ही.ए. पॉवर सब स्टेशन ऊर्जा विभाग द्वारा स्थापित किया जायेगा। परियोजना में सामान्य सुविधा केन्द्र (CFC) की स्थापना भारत सरकार की एमएसई-सीडीपी योजना अथवा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा की जायेगी। एसपीव्ही की सहमति एवं अनुशंसा से निवेशकों के लिये आरक्षित भू-खण्डों का आवंटन, मध्यप्रदेश एमएसएमई को औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन एवं प्रबंधन नियम 2021 के प्रावधान अनुसार किया जायेगा।

लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग

मंत्रि-परिषद ने लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग में नवीन योजना लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन जिला प्रोत्साहन योजना तथा वित्तीय वर्ष में परिसम्पत्ति के निर्वर्तन से प्राप्त (परिसमापक एवं सार्वजनिक उपक्रम / बोर्ड की राशि को छोड़कर) राशि का 25 प्रतिशत बजट प्रावधान आगामी 04 वर्षों (2022-23, 2023-24 2024-25 एवं 2025-26) के लिए स्वीकृत किया। लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग में नवीन योजना लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन जिला प्रोत्साहन योजनांतर्गत प्रस्तावित समिति एवं समिति की शक्तियाँ/कृत्यों को स्वीकृत किया गया। लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन जिला प्रोत्साहन योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को भी स्वीकृत किया गया।

संपत्ति का निर्वर्तन

मंत्रि-परिषद ने राजस्व विभाग की जिला रायसेन स्थित पुरानी तहसील का सर्वे नं. 497(स) कुल रकबा 971 वर्गमीटर के निर्वर्तन के लिए एच-1 निविदाकार द्वारा उच्चतम निविदा राशि 55 लाख 50 हजार रूपये जमा करने के बाद अनुबंध/रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने का निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने ऊर्जा विभाग की वार्ड क्र. 21, अम्बेडकर वार्ड, गायत्री नगर, कटनी स्थित परिसम्पत्ति के 03 भू-खण्ड पार्सलों के निर्वर्तन हेतु आमंत्रित निविदा में एच-1 निविदाकार को उच्चतम निविदा राशि 12 करोड़ 74 लाख 64 हजार रूपये, ब्लॉक-2 की उच्चतम निविदा राशि 7 करोड़ 50 लाख रुपये एवं ब्लॉक-3 की उच्चतम निविदा राशि 13 करोड़ 39 लाख रूपये का अनुमोदन करते हुए H-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100% जमा करने के बाद अनुबंध/रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने  का निर्णय लिया।

पद सृजन

मंत्रि-परिषद ने अतिरिक्त महाधिवक्ता के 03 नवीन पद और उप महाधिवक्ता का 1 नवीन पद सृजित किये जाने का निर्णय लिया। उच्च न्यायालय के समक्ष अधिकाधिक प्रकरणों में राज्य शासन पक्षकार होता है, जिससे अनेक चुनाव याचिकाएँ, जनहित याचिकाएँ, नियम अधिनियम एवं शासकीय योजनाओं आदि जिनमें राज्य शासन का उचित एवं श्रेष्ठ पक्ष समर्थन करने हेतु महाधिवक्ता एवं वरिष्ठ विधि अधिकारियों की पर्याप्त संख्या उपलब्ध रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया।

भूमि अधिग्रहण

मंत्रि-परिषद ने इन्दौर- पीथमपुर इन्वेस्टमेंट रीजन में अधिसूचित क्षेत्र में द्वितीय चरण में किसानों से आपसी सहमति के आधार पर वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 में 500 हेक्टेयर निजी भूमि सेक्टर 4, 5 एवं 6 में औद्योगिक विकास के लिए लैंड पूलिंग के माध्यम से  अधिग्रहित किये जाने की अनुमति दी।

 अन्य निर्णय

मंत्रि-परिषद ने जिला न्यायाधीश (वरिष्ठ वेतनमान) के संवर्ग को संवर्ग अनुक्रम में सम्मिलित करने संबंधी खण्ड में संशोधन को मंजूरी दी। शेट्टी वेतन आयोग (प्रथम राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग) ने देश में उच्चतर न्यायिक सेवा और निम्नतर न्यायिक सेवा के सदस्यों के एक समान पदाभिधान अंगीकृत किए जाने के आशय के साथ अनुशंसाएँ की थी, जो 'ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया तथा अन्य (निर्णय दिनांक 8 फरवरी 2001) के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुमोदित की गई हैं।

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