विशेष लेख : ज़िले के बालवाड़ी केंद्रों में बच्चें खेल आधारित गतिविधियों के जरिए पढ़ना सीख रहे

 
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महासमुंद :  छत्तीसगढ़  सरकार ने चालू शिक्षा सत्र (16 जून 2022) से प्रदेश के सभी ज़िलों में बालवाड़ी केंद्र शुरू किए। महासमुंद सहित पाँचों ब्लाक में 312 बालवाड़ी  केंद्र शुरू किए गए है। इस योजना से ज़िले में लगभग 3500 से ज़्यादा बच्चें लाभान्वित हो रहे है। वही पूरे प्रदेश की बात करें तो लगभग 6500 से ज़्यादा बालवाड़ी केंद्र में यह संख्या लगभग 68 हजार के क़रीब है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि ज़िले में  सबसे अधिक बालवाड़ी केंद्र पिथौरा ब्लाक में 75 और सबसे कम 48 सरायपाली में स्थापित है। वही बसना में 74, बागबाहरा में 48 और महासमुंद ब्लाक में 53 बालवाड़ी केंद्र संचालित है। जहाँ 5 से 6 आयु वर्ग के बच्चों को केंद्रों में स्कूल की तरह ही खेल आधारित गतिविधियों के जरिए सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।


    प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के अंतर्गत पांच से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए ऐसे स्थानों पर बालवाड़ी स्थापित किए गए , जहां आंगनबाड़ी और प्राइमरी स्कूल एक ही परिसर में है या आसपास है।  प्राइमरी स्कूल के शिक्षक ही पास के लगे आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर या स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहे है।


     इनमें पांच से छह साल तक के बच्चों को दाखिला देकर उनके बौद्धिक विकास के लिए काम किया जा रहा है।  सरकार गठन के बाद से राज्य सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि पर काफ़ी ज़ोर दिया है। नौनिहालों को पढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम निर्धारित किया है। बालवाड़ियों की निगरानी भी की जा रही है।इसके लिए राज्य स्तर पर कमेटी बनी है।


    महासमुंद ज़िले के बसना ब्लॉक के करनापाली प्राथमिक विद्यालय में संचालित बालवाडी में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक (दो घंटे) बच्चों को खेल गतिविधियों के साथ पढ़ाया जा रहा है। इनमें प्रभारी प्राचार्य  वीरेंद्र कुमार कर, केंद्र प्रमुख गिरधर साहू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुलोचना पटेल महती भूमिका निभा रहे है। ये बच्चे स्कूली बच्चों के साथ मध्याह्न भोजन भी करते है। साथ ही गाँव वालों का पूरा सहयोग भी मिल रहा है। इस स्कूल में 16 बच्चें है।


आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले नौनिहालों के खाने-पीने और खेलने-कूदने की व्यवस्था महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपी गयी है। बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग और पठन-पाठन की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति विकास विभाग पूरी जिम्मेदारी निभा रहे है।  


      ‘बालवाड़ी‘ के संचालन के लिए बच्चों की सामग्री ‘बालवाटिका‘ तैयार की जा चुकी है। बालवाड़ी का संचालन स्कूल परिसर में भोजन अवकाश के पूर्व दो घंटे संचालित किया जा रहा है। जहां उपयुक्त जगह नहीं है वहाँ अतिरिक्त कक्ष के निर्माण के लिए कार्यवाही भी की जा रही है।


इस योजना से शाला पूर्व ही बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान बेहतर हो रहा है जो प्राथमिक स्तर में बच्चों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने में नींव का पत्थर साबित होगा।
    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा 26 जनवरी 2022 को गणतंत्र दिवस पर जनता के नाम अपने संदेश में बालवाड़ी योजना के संचालन की घोषणा की गई थी। उसी के अनुरूप यह योजना शुरू की जा रही है।
छत्तीसगढ़ बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के लक्ष्य और उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए बेहतर क्रियान्वयन एवं समन्वय से कार्य संपादित कर रहा है। शिक्षा के अधिकार के प्रावधान के अनुसार 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों के बेहतर और गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने की ओर अग्रसर है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रावधानों के अनुरूप सभी क्षेत्रों में कार्य नीति का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
  मालूम हो कि राष्ट्रीय शिक्षा कॉन्क्लेव 2021 में छत्तीसगढ़ शासन ने अपने विजन डाक्यूमेंट में अरली चाईल्डहुड केयर एण्ड एजुकेशन के लिए ऐसा वातावरण निर्माण करने का संकल्प लिया था, इसके अंतर्गत बिना भेदभाव के सभी छोटे आयु के बाल और बालिकाओं की देखभाल और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे है।

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